


साहित्यकार डॉ. सीपी देवल ने कहा कि राजस्थानी होने के नाते मैं आजादी के उत्सव को उत्सव नहीं समझता, राजस्थानी भाषा को अगर मान्यता मिली होती तो आज राजस्थान में कोई अंगूठा छाप नहीं होता, बल्कि राजस्थान पूर्ण साक्षर होता।
राजस्थान फोरम की मासिक डेजर्ट सोल सीरीज में साहित्य प्रेमियों सेगुरुवार को रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि महाभारत सिर्फ भारत का ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का सबसे उच्चतम ग्रंथ है, जिसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सभी कुछ मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोकगीत, लोक संगीत और लोक परंपराएं ये अगर खो जाए तो इस नुकसान की भरपाई कभी नहीं की जा सकती। हर शास्त्र की कसौटी लोक हैं, जिसे सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जब राजस्थानी भाषा को लुंगढ़ी की तरह ओढ़ लिया है तो ये जिम्मेदारी बनती है कि उस लुंगढ़ी का पल्ला, पलटे सबको अच्छे से समझूं।
विश्वमोहन भट्ट रहे मौजूद इस अवसर पर कई गणमान्य साहित्यकार मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले कार्यकारी सचिव अपरा कुच्छल ने सभी साहित्य प्रेमियों का स्वागत किया और राजस्थान फोरम के सांस्कृतिक समन्वयक सर्वेश भट्ट ने सी पी देवल और मालचंद तिवारी का परिचय करवाया। अंत में राजस्थान फोरम के सभापति पद्मभूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट ने दोनों साहित्यकारों स्मृति चिन्ह भेट किया।