


पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बाद प्रदेश की राजनीति में जाट नेता और विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही पार्टी के लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे परसराम मदेरणा के स्टेच्यू पर विवाद खड़ा हो गया है। इसके लिए परसराम मदेरणा की पोती कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी को पत्र लिखा है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि विधानसभा में राजनीतिक इतिहास से परिचय करवाने के उद्देश्य से बनाया गया राजनीतिक आख्यान संग्रहालय विवादों में आ गया। संग्राहालय में लगाए गए राजनीतिक हस्तियों के स्टेच्यू को लेकर लगातार आपत्ति की जा रही है। पहले पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अपने स्टेच्यू को लेकर नाराजगी जताई थी। अब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा के स्टेच्यू को लेकर विवाद हो गया है। परसराम मदेरणा की पोती दिव्या मदेरणा ने अपने दादा और जाट राजनीति में दबदबा रखने वाले परसराम मदेरणा के स्टेच्यू की फोटो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि यह की से भी मदेरणा जैसी नजर नहीं आ रही हैं। इसे तत्काल बदला जाना चाहिए ।
इससे पहले पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी खुद के स्टेच्यू की बनावट को लेकर भी आपत्ति जताई थी। उल्लेखनीय है कि सीएम अशोक गहलोत ने 29 जुलाई 2019 को प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में अत्याधुनिक राजनीतिक आख्यान संग्रहालय विधानसभा भवन में बनाने की घोषणा की थी। जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने विधानसभा के भवन में ही इसे तैयार किया है। विधानसभा भवन की ऊपरी और निचले भूतल में स्थित 26 हजार स्क्वायर फीट में बना यह विशाल संग्रहालय अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश की गौरवमयी गाथा और राजनीतिक आख्यानों को प्रस्तुत करता है।
संग्रहालय में जनप्रतिनिधियों और निर्माताओं के योगदान को देखा जा सकता है। लेकिन जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा तैयार किए गए स्टैचू सही तरीके से नहीं बनाए जाने के कारण यह विवाद का कारण बन रहे हैं। यह यह बात भी सही है कि आखिर स्मार्ट सिटी योजना का पैसा विधानसभा के संग्रहालय में क्यों लगाया गया इसका जवाब देना पड़ेगा। स्मार्ट सिटी का बजट शहर को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने पर खर्च किया जाना था। लेकिन यह संग्रहालय पर किसके कहने से और क्यों खर्च किया गया इसका जवाब तो सरकार और विधान सभा सचिवालय ही दे सकता है। विधानसभा संग्रहालय आम लोगों से कितना पास और कितना दूर है यह सब जानते हैं।