Saturday, 29 August 2026

सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव: भाजपा को कांग्रेस के साथ ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से भी करना होगा मुकाबला


सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव: भाजपा को कांग्रेस के साथ ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से भी करना होगा मुकाबला

सरदारशहर के उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही कांग्रेस, भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक  पार्टी में उमेदवार चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है। कांग्रेस सहानुभूति लहर को देखते हुए स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा जो कि वर्तमान में ओबीसी आयोग के अध्यक्ष हैं को चुनाव मैदान में उतारने का मानस मानस बना चुकी है। फिलहाल फैसला होना बाकी है गतिविधियां तेज है दोनों ही पार्टियों ने चुनाव को पक्ष में करने के लिए सरदारशहर में पार्टी की गतिविधियों को तेज कर दिया है। 

कांग्रेस चुनाव को जीतकर आने वाले वर्ष 2023 के चुनाव  अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रही है। भाजपा ने भी अब इस चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए नई रणनीति तैयार की है। केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन लाल मेघवाल को चुनाव प्रभारी बनाया है। अर्जुन लाल मेघवाल चूरू के कलक्टर भी रहे हैं ऐसे में उन्हें वहां की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी है। 

भाजपा की कोशिश है कि वह एससी और एसटी वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए कुछ लोगों को वहां जिम्मेदारी दी गई है।भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  डॉ सतीश पूनिया के सामने  उपचुनाव एक नई चुनौती आ गई है। हार जीत का उनके राजनीतिक भाग्य का फैसला भी निर्भर करेगा। ऐसे में सरदारशहर का उपचुनाव निश्चित तौर पर भाजपा और कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती लेकर आया है। यह बात भी सही है भाजपा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शेखावाटी क्षेत्र से आते हैं ऐसे में जीत हार का फैसला उन दोनों के लिए भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जाएगा । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  डॉ.सतीश पूनिया मूल रूप से चूरु जिले से आते हैं । 

हालांकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष  गोविंद सिंह डोटासरा सीकर से आते हैं। परिस्थिति कुछ भी हो लेकिन चुनाव निश्चित तौर पर दोनों ही पार्टियों के लिए एक नई ऊर्जा का संचार पैदा करेगा। कांग्रेस भाजपा के बीच में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी खलल डालने का काम करेगी। जीत हार में लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी ऐसे में भाजपा की कोशिश है कि वह किसी तरह से अपनी नैया पार कैसे लगाएं हर कोशिश में जुटी हुई है। इस चुनाव में भाजपा ने विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठौड़ मैं तो जिम्मेदारी नहीं दी है। इसका मूल कारण यह है कि वहां के सांसद राहुल कसवा घोर विरोधी है। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी किसी भी तरह चुनाव जीतना चाहते हैं जिससे कि पार्टी हाईकमान यह जता सके उनका विश्वास अभी भी कार्यकर्ताओं में मौजूद है। यही कारण है कि भाजपा कांग्रेस सहानुभूति वोटों को बटोरने की रणनीति में लगी हुई है । सचिन पायलट को साथ लेकर रणनीति बनाने के पक्ष में सीएम गहलोत नहीं है। ऐसे मेंपायलट को कैसे दूर रखा जाए यही रणनीति गोपनीय रूप से बनाई जा रही है। जबकि स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा शुरुआती दौर में पायलट के समर्थक थे लेकिन  सीएम गहलोत ने बगावत के बाद उन्हें अपने पक्ष में कर लिया था 4 ग्राम यही कारण है कि उनके पुत्र को राजनीतिनियुक्ति भी दी गई । 

सरदारशहर विधानसभा के उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम का फैसला भी अब जल्दी होने वाला है दोनों ही पार्टियों ने प्रत्याशियों के नाम का फैसला लगभग कर लिया है। अब तो हाईकमान की मोहर लगाई जानी बाकी है।  कहने को तो दोनों पार्टी में चुनाव लड़ने वालों की लंबी सूची है। 

 कांग्रेस विधायक रहे स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा के भाई श्यामलाल शर्मा, पूर्व विधायक अशोक पिंचा, विधि प्रकोष्ठ के पूर्व सह-संयोजक शिवचंद साहू, पूर्व केंद्रीय मंत्री दौलतराम सारण की पुत्रवधू सुशीला सारण, पूर्व प्रधान सत्यनारायण सारण, सत्यनारायण झांझड़िया, गिरधारीलाल पारीक, प्रधान प्रतिनिधि मधुसूदन राजपुरोहित भाजपा से टिकट के प्रमुख दावेदार हैं।

भाजपा के सामने यह भी मुश्किल है कि  सहानुभूति वोट बैंक को देखते हुए  स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा के भाई पर दांव लगाया जाए या नहीं। पिछले लम्बे समय से वहां ब्राह्मण उम्मीदवार ही जीतता रहा है। कांग्रेस से विधायक रहे स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा का कांग्रेस से टिकट तय माना जा रहा है। ऐसे में सहानुभूतिवोटों का नुकसान भी  भाजपा को हो सकता है। उसे देखते हुए अनिल शर्मा के चाचा श्यामलाल पर  भाजपा  दांव चल सकती है।

मौजूदा परिस्थितियों को लेकर पार्टी के सामने यह भी दुविधा है कि इस बार ब्राह्मण या जाट को उम्मीदवार बनाया जाए। सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 65000 जाट और 45 हजार से ज्यादा ब्राह्मण मतदाता है ।  इसके अलावा यहां पर एससी एसटी और अन्य मतदाता भी हैं जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करेंगे। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यहां से जाट उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार सकती है। ऐसे में भाजपा के सामने एक नई चुनौती सामने आएगी और जीत हार में बहुत बड़ी भूमिका राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की रह सकती है। जैसे पूर्व के उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भाजपा को करारी चुनौती दी थी।

 




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