


अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में गार्बेज टू गोल्ड विषय पर चार दिवसीय सेमीनार शुक्रवार को संपन्न हुई। सेमीनार के केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संसाधन व्यक्ति, एलएलआरएम परियोजनाएं के अधिकारी और मुख्य वक्ता सी श्रीनिवासन ने कचरे को आय में कैसे बदलें इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। चार दिनों तक चली सेमीनार में हिस्सा लेने आए शहरवासियों ने शहर को कचरा मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया। सेमीनार में महापौर श्रीमती ब्रजलाता हाड़ा, नगरनिगम आयुक्त एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
सेमीनार के अंतिम दिन अधिवक्ता, सैलून, मछली विक्रेता, नोनवेज विक्रता, माली, अस्पताल, रेडक्रॉस सोसायटी, होस्टल और डीएलओ सहित राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता सी श्रीनिवासन ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी कि घरों एवं संस्थानों से निकलने वाले कचरे को आय में बदल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि जिसे हम कचरा मान रहे होते हैं वह हकीकत में कचरा होता नहीं है। वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किए गए कचरे से आय संभव है।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की बोतल, कागज के खाली डिब्बे, मेटल की बोतल सहित अन्य सामान को हम बिना सेग्रीगेट किए डस्टबीन में डाल देते हैं। इसी डस्टबीन में हम रसोई घर में काटी गई सब्जियों के शेष बचे हिस्से को भी मिला देते हैं। घर में रखे डस्टबीन में सूखा एवं गीला कचरा एक कर देते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस सिद्धांत को बदलना होगा। यदि हम अपने ही घर में कचरे को अलग-अलग कर लेते हैं तो उसकी कीमत हम वसूल सकते हैं।
एल्युमिनियम के डिब्बे- शीतल पेय के डिब्बे, खाद्य पदार्थों के टिन और इसी तरह के सामान अच्छे दामों पर बेचे जा सकते हैं। आकार एवं वजन के आधार पर कबाड़ी इनकी अच्छी कीमत दे सकते हैं। एल्युमिनियम के खाली डिब्बों को स्टोर करना मुश्किल काम नहीं है, कम स्थान पर आसानी से स्टोर किया जा सकता है।
कांच की बोतलें – कांच की खाली बोतलें भी आसानी से बिक जाती है। उपयोग में लाने के बाद कांच की बोतलों को साफ कर घर में सुरक्षित स्थान पर रख लें। जब इनकी संख्या अधिक हो जाए तो इसे बेचा जा सकता है। जबकि आमतौर पर हम कांच की बोतल को उपयोग करने के पश्चात फैंक देते हैं।
कागज और कार्डबोर्ड- अखबार, पत्रिकाएं और गत्ते का घरों में बहुत सारा कचरा होता है। इन्हें संभालकर सुव्यवस्थित रख कर इनकी कीमतें वसूल की जा सकती हैं।
हमारी रसोई में बहुत सारा कचरा पैदा होता है। जैसे फल और सब्जियों के टुकड़े, अंडे के छिलके, मांस, मछली और मुर्गे के स्क्रैप एवं अन्य सामान। ऐसे रोजमर्रा के कचरे से पैसे कमाने के लिए घर पर ही खाद बनाकर बेचा जा सकता है। श्रीनिवासन ने बताया कि रसाई घर में सब्जी काटने के बाद बचे शेष कचरे को एकत्र कर गौ शाला में दिया जा सकता है। अंडे के छलकों की साफाई कर उससे कैल्सियम पाउडर बनाया जा सकता है। जिसकी बाजार में 300 रूपये कीमत मिल सकती है।
जैविक और अजैविक कचरे का समय पर निस्तारण कर लिए जाने से उपयोग में आ सकता है। श्री श्रीनिवासन का मानना है कि कोई भी चीज अनुपयोगी नहीं होती है। समय पर उपयोग करने पर उसे आय में बदला जा सकता है। उन्होंने तमीलनाडू के वैल्लोर शहर का उदाहरण देते हुए बताया कि एसएलआरएम सिस्टम को अपनाकर शहर को कचार मुक्त कर दिया गया है।
महापौर श्रीमती ब्रजलता हाड़ा ने कहा कि गार्वेज-2-गोल्ड विषय पर आधारित सेमीनार में सभी लोगों ने हिस्सा लिया। कचरे को जब हम घरों में ही अलग-अलग करने लगेंगे तो कचरा डिपों में कचरे के ढेर नहीं लगेंगे। एसएलआरएम सिस्टम को यहां पर भी लागू किया जाएगा। इसके लिए इच्छुक लोगों को प्रशिक्षिण भी दिलवाया जाएगा।
नगर निगम आयुक्त एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि चार दिवसीय सेमीनार कारगर रही है। चारों दिनों अलग-अलग वर्गों को आमंत्रित किया गया था। सभी वर्गों में बढ़चढकर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम में सफाई कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें भी एकत्र किए गए कचरे को कचरा पात्रा में ही डालना चाहिए। ताकि उसका सही तरह से निस्तारण किया जा सके।
स्टार्टअप ने दी जानकारी
स्टार्टअप एमआर कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि वे चिकन वेस्ट का उपयोग कर कई प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं। जिन्हें आमतौर पर कचरा समझकर फैंक दिया जाता है उसी चिकन वेस्ट के उत्पादों की बाजार में काफी डिमांड है। मुर्गियों के फर से रूई का निर्माण किया जाता है, इस रूई से धागे बनाए जाते हैं और इन धागों की मदद से शॉल, जैकेट सहित अन्य उत्पादों का निर्माण किया जाता है।