Saturday, 29 August 2026

इण्डिया स्टोनमार्ट-2022: रोजगार सृजन में पत्थर उद्योग का अहम योगदान: गहलोत


इण्डिया स्टोनमार्ट-2022: रोजगार सृजन में पत्थर उद्योग का अहम योगदान: गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरूवार को इण्डिया स्टोनमार्ट-2022 के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पत्थर व्यवसाय का एक लंबा इतिहास रहा है। आयामी पत्थर राजस्थान का एक प्रमुख खनिज है। देश-विदेश तक यहां के पत्थर को एक विशेष पहचान मिली है। राज्य सरकार निरंतर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे खनन और उद्योग क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही रोजगार और राजस्व में भी बढ़ोतरी हो रही है।

सीएम गहलोत गुरूवार को सीतापुरा में आयोजित इण्डिया स्टोनमार्ट-2022 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन्वेस्ट राजस्थान समिट से प्रदेश में निवेश के प्रति अच्छा माहौल बना है। सीएम गहलोत ने कहा कि इन्वेस्ट राजस्थान समिट से प्रदेश में निवेश का एक आदर्श वातावरण बना है। इस समिट में पत्थर उद्योग से जुड़े लगभग 800 करोड़ रूपए के एमओयू साइन हुए हैं। राज्य में खनिज भण्डारों के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन और प्रभावशाली नीतियाँ लागू करने से बड़े स्तर पर निवेष की संभावनाएँ बढ़ी हैं। 

सीएम गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए “मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना” लागू की है।  उन्होंने कहा कि एमएसएमई एक्ट के बाद अब तक 15000 एमएसएमई इकाइयां रजिस्टर्ड हुई हैं। इनमें से 6000 इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ की तर्ज पर प्रदेश में राजस्थान इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स का गठन होगा। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्थर उद्योग के विकास में बहुमूल्य योगदान के लिए आर.के ग्रुप के अशोक पाटनी, जेम ग्रुप के आर वीरमणी और राजस्थान उद्योग के अरूण कुमार अग्रवाल को सी-डॉस लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। साथ ही, अखिल भारतीय स्टोन आर्किटेक्चर अवॉर्ड का भी वितरण किया गया।

उद्योग मंत्री श्रीमती शकुंतला रावत ने कहा कि राजस्थान पहले कभी सिर्फ मार्बल और सेंडस्टोन के लिए ही जाना जाता था। पिछले 10 वर्षों में जालोर,किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द और उदयपुर आदि क्षेत्रों में बड़े स्तर पर ग्रेनाइट की खनन और प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से ग्रेनाइट उद्योग तेजी से विकसित हुआ है। हमारे ग्रेनाइट के विभिन्न रंग और किस्में बहुत लोकप्रिय हो रही हैं। इस उद्योग को गति देने के लिए ही रीको के माध्यम से सेन्टर फॉर डवलपमेन्ट ऑफ स्टोन्स की स्थापना की गयी थी। यह संस्था पत्थर उद्यमियों को विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते करवाने के लिए एक मंच प्रदान कर रही है।

मुख्य सचिव श्रीमती उषा शर्मा ने कहा कि इण्डिया स्टोनमार्ट की रूपरेखा सीएम गहलोत के पहले कार्यकाल में वर्ष 2000 में बनी थी। इसका उद्देश्य विश्व के मानचित्र पर भारत के पत्थर उद्योग को प्रमुखता से स्थापित करना था। उसी वर्ष इसका प्रथम बार सफल आयोजन किया गया। पिछले 22 वर्षों के अरसे में इस प्रदर्षनी के आकार, प्रस्तुतिकरण ने व्यापक रूप ले लिया है। व्यापार जगत के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी बहुत बढ़ी है। विष्व स्तर की इस  प्रदर्शनी को न केवल भारत में बल्कि विष्व की चुनिन्दा प्रदर्षनियों में स्थान मिला जोकि गर्व की बात है।

रीको के अध्यक्ष कुलदीप रांका ने कहा कि देश के पत्थर उत्पादन में राजस्थान की 70 फीसदी भागीदारी है। आयामी पत्थर राजस्थान का एक प्रमुख खनिज है। यहां मार्बल,  सेंडस्टोन, ग्रेनाइट, कोटास्टोन, स्लेट आदि के प्रचुर भंडार हैं। इनका वैज्ञानिक तरीके से दोहन और प्रसंस्करण अपनाकर पत्थर उद्योग विगत वर्षों में अपनी एक विषेष पहचान बना चुका है। प्रदेश में 4,920 माइनिंग लीज हैं। देश में मार्बल और सेंडस्टोन का 90 प्रतिशत राजस्थान में उत्पादन होता है। राज्य के लगभग 10 लाख से अधिक व्यक्तियों को इससे रोजगार मिल रहा है।

इस अवसर पर राजस्थान लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग श्रीमती वीनू गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव खनन श्री सुबोध अग्रवाल, फिक्की के चैयरमैन अशोक कजारिया, सी-डॉस के मुकुल रस्तोगी, रीको के प्रबंध निदेशक शिवप्रसाद नकाते सहित अन्य अधिकारी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।



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