Saturday, 29 August 2026

हर घर से होगा कचरे का निस्तारण,जवाहर रंगमंच पर चार दिवसीय सेमीनार शुरू, सी श्रीनिवासन ने दी एकीकृत और टिकाऊ ठोस और तरल संसाधन प्रबंधन की जानकारी


हर घर से होगा कचरे का निस्तारण,जवाहर रंगमंच पर चार दिवसीय सेमीनार शुरू, सी श्रीनिवासन ने दी एकीकृत और टिकाऊ ठोस और तरल संसाधन प्रबंधन की जानकारी

अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में गार्बेज टू गोल्ड विषय पर चार दिवसीय सेमीनार मंगलवार से शुरू हुई। सेमीनार के मुख्य वक्ता सी श्रीनिवासन ( संसाधन व्यक्ति, एलएलआरएम परियोजनाएं, शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार ) ने घर, होटल, रेस्टोरेंट, व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले संस्थान, नीजी एवं सरकारी कार्यालयों सहित अन्य स्थानों से उत्पन्न होने वाले कचरे के निस्तारण की विस्तार से जानकारी दी। 

सेमीनार में नगर निगम महापौर श्रीमती ब्रजलता हाड़ा, जिला कलक्टर एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंश दीप और नगर निगम आयुक्त एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि और नगर निगम के कर्मचारी मौजूद थे

सी श्रीनिवासन ने बताया कि एलएलआरएम का उद्देश्य वर्ष 2024 तक देश को कचरे एवं अपशिष्ट कचरे से मुक्त करना है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए सभी को सहयोग देना होगा। सभी नागरिक आने कर्तव्यों का पालन करने लगेंगे तो हमें निश्चित ही सफलता मिलेगी। उन्होंने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से विस्तार से बताया कि किस प्रकार घरों एवं अन्य स्थानों से निकलने वाले कचरे का आसानी से निस्तारण किया जा सकता है। विभिन्न शहरों में कचरे का सही निस्तारण नहीं होने से कचरे के पहाड़ बनते जा रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने बताया कि देश भर में लगभग एक लाख मैट्रिक टन जैबिक एवं अजैबिक कचरा घरों से बाहर निकलता है। उन्होंने तमीलनाडृ के विल्लौर शहर का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार कचरे का प्रबंधन कर उन्होंने इस समस्या से स्थाई समाधान निकाल लिया है। उन्होंने स्वयं सेवी समूहों के माध्यम से इस काम को सफलता पूर्वक ना केबल पूर्ण किया वरन कचरे से आय का जरिया भी तैयार किया है। इस समूह से जुड़ी कई महिलाओं को रोजगार भी मिले हैं। इस मौके पर उन्होंने सूखे नाले और नालियों का किस प्रकार बागवानीमें उपयोग किया जा सकता इसकी भी जानकारी दी। सूखे पत्तों से जैविक खाद्य बनाने की भी विधि बताई। 

स्टार्टअप ने दी जानकारी 

जीरो वेस्ट मैनेजमेंट की दी जानकारी  

सेमीनार के दौरान उन्होंने जीरो वेस्ट मैनेजमेंट की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरों से निकलने वाले कचरे का भी सद्पयोग कर इस परेशानी से बचा जा सकता है। प्रत्येक घर में हरा और लाल डस्टबीन रखने होंगे। जिनमें सूखा और गीला कचरे को एकत्र किया जा सकता है। स्वयं सेवी समूह इस कचरे को एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से उसकी छंटाई करते हैं। उपयोग में एवं फैक्ट्रियों में आने वाले कचरे को अलग कर उसका निस्तारण करते हैं। 

हर दो किमी पर हो कचरे का निस्तारण 

सी श्रीनिवासन ने बताया कि कचरे को डंपिंग यार्ड पर भेजने के बजाए हर दो किमी पर उसका निस्तारण किया जाना चाहिए। इसके लिए एसएलआरएम नये मॉडल पर कार्य कर रहा है। घर से निकलने वाले को हर 12 घंटे में, होटल-रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ हर 6 घंटे और सब्जी मंडी, फिश मार्केट व अन्य स्थानों से निकलने वाले कचरे को हर 3 से 4 घंटे में एकत्र कर लिया जाना चाहिए। यदि यह कचरा ज़्यादा समय तक एक ही जगह पर पड़ा रहता है तो उसमें से बदबू आने लग जाती है, और उपयोग में आने लायक भी नहीं रहता है। एक डेमोस्ट्रेशन के माध्यम से उन्होंने बताया कि घर से निकलने वाले कचरे का किस प्रकार निस्तारण किया जा सकता है। 

नगर नगम आयुक्त एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि सेमीनार में दी गई जानकारियां सभी के लिए महत्पूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि किशनगढ़ में मार्बल स्लैरी के डंपिंग यार्ड बनते जा रहे थे, यह एक भारी समस्या थी। लेकिन जब से गुजरात में इसका उपयोग होने लगा तो इसकी भी कीमत मिलने लगी है। उन्होंने कहा कि सही जगह पर बेचा जाए तो सब कुछ बिक सकता है।  

बुधवार को यह लेंगे सेमीनार में हिस्सा 

सेमीनार के दूसरे दिन बुधवार को रेलवे, सीआरपीएफ, विभिन्न स्कूलें, जेल, जेटीआई, पुलिस लाइन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, डेयरी मालिक, पशु पालक, पालतू जानवर के मालिक हिस्स लेंगे



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