


ग्रेटर नगर निगम में मेयर का चुनाव अब भाजपा के 3 वर्तमान और 2 पूर्व विधायकों कालीचरण सराफ, अशोक लाहोटी, नरपत सिंह राजवी, पूर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत और कैलाश वर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। वसुंधरा गुट के इन विधायकों की सांसें इसलिए भी ऊपर-नीचे हो रही हैं, क्योंकि 25 से ज्यादा पार्षद अब भी चौमू के चोमू पैलेस की बाड़ेबंदी से दूर हैं। ऐसे में विधायकों को अब क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है।
वर्ष 2019 में भी जब घटनाक्रम हुआ था तब सभी पार्षद होटल में थे, लेकिन उसके बाद भी पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इस बार तो कई पार्षद गायब हैं।वर्तमान स्थिति की बात करें तो अभी 146 में से भाजपा के 85 पार्षद हैं, जबकि 8 निर्दलीय उनके सपोर्ट में है। सूत्रों के मुताबिक इन सभी 93 में से केवल 54 ही पार्षद चौमू पैलेस में मौजूद हैं।पार्टी के नेताओं का दावा है कि 6 नवंबर तक 3 पार्षदों को छोड़कर सभी पार्षद होटल पहुंच जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक गुरुवार को कार्यवाहक मेयर शील धाबाई का घटनाक्रम जो भाजपा मुख्यालय में हुआ उसको सभी ने देखा है। ऐसे में एक-एक वोट साधने के लिए पार्टी डैमेज कंट्रोल करना शुरू कर दिया। इसके लिए शील धाबाई से इसकी शुरुआत की गई। धाबाई की नाराजगी को दूर करने के लिए उनसे एक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ अरुण चतुर्वेदी ने बातचीत की और उन्हें मनाया। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति ने धाबाई की पार्टी के ही उच्च पदाधिकारी से भी बात करवाई।
भाजपा ने एक-एक दिन सभी विधायकों और सांसद का सेशन निर्धारित किया है। शनिवार को मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ होटल पहुंचे और उन्होंने सभी पार्षदों से मुलाकात की। उन्होंने सभी एकजुट रहने के लिए कहा। इसी तरह अलग-अलग दिन अलग-अलग विधायक पार्षदों से मिलेंगे और स्थिति को भाजपा के पक्ष में करने की कोशिश करेंगे।
ग्रेटर नगर निगमक्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्र विद्याधर नगर, झोटवाड़ा, मालवीय नगर, सांगानेर और बगरू आते है। इसमें सबसे ज्यादा 26 पार्षद विधायक नरपत सिंह राजवी विद्याधर नगर से ही है। यहां के 12 से ज्यादा पार्षद रश्मि सैनी के विरोध में है। लाइट समिति अध्यक्ष रहते हुए सैनी के पति संग उनका विवाद हुआ था और उनके खिलाफ धरना भी दिया था। इसके अलावा झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के भी कुछ पार्षद सैनी से नाराज है, जिससे पूर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत के लिए भी परेशानी बढ़ सकती है।
विद्याधर नगर, झोटवाड़ा और मालवीय नगर के अलावा 29 पार्षद बगरू और सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से हैं। सांगानेर से विधायक डॉ.अशोक लाहोटी और बगरू से पूर्व विधायक कैलाश वर्मा दोनों को अपने अपने पार्षदों को मनाने की जिम्मेदारी दी है । कैलाश वर्मा के एरिया में 9 पार्षद हैं, लेकिन वे खुद इन पार्षदोंके साथ सक्रिय नहीं हैं। इन पार्षदों का कहना है किउनके वार्ड के क्षेत्रों में सौम्या गुर्जर और शील धाबाई के समय ज्यादा काम हुए है। यहां के पार्षदों की सबसे ज्यादा परेशानी सफाई, रोड लाईट और सड़कों को लेकर है। ऐसे में पार्टी के नेताओं के लिए यहां के ज्यादातर पार्षदों की नाराजगी को दूर करके सभी के वोट रश्मि सैनी के पक्ष में दिलवाना बड़ी चुनौती है।
सांगानेर क्षेत्र से भी जीतकर आए 20 पार्षदों में कुछ पार्षद नाराज है। इसमें भारती लख्यानी मेयर पद की दावेदार थीं, लेकिन उनके नाम पर विधायक डॉ.अशोक लाहोटी ने कोई पैरवी नहीं की। ऐसे में उनकी नाराजगी को दूर करने का जिम्मा डॉ.लाहोटी पर है।
वर्तमान में भाजपा के पास बहुमत से 19 पार्षद ज्यादा है, जबकि कांग्रेस को इस चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए 21 और पार्षदों की जरूरत है। कांग्रेस के पास वर्तमान में 49 स्वयं की पार्टी के और 4 निर्दलीय यानी कुल 53 पार्षद है। जीत के लिए 74 वोटों की जरूरत है।
साल 2019 में जब चुनाव महापौर का उपचुनाव हुआ था, तब 90 में से भाजपा के पास 62 पार्षद (विष्णु लाटा के अलावा) थे और जीत के लिए बीजेपी को 46 वोट चाहिए थे। कांग्रेस के पास 18 पार्षद थे, जबकि 9 निर्दलीयों का समर्थन यानी कुल 27 पार्षद थे। फिर भी विष्णु लाटा भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े और उन्हें 45 वोट मिले थे, जबकि भा ज पा के मनोज भारद्वाज को 44 वोट और एक वोट खारिज हो गया था।