


भाजपा ने वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में ग्रेटर नगर निगम क्षेत्र आने वाली 5 विधानसभा क्षेत्र मालवीय नगर, झोटवाड़ा, सांगानेर, विद्याधर नगर और बगरू विधानसभा का हिस्सा जयपुर ग्रेटर नगर निगम के सैनी-कुमावत वोटर को साधने के लिए रश्मि सैनी को मेयर का प्रत्याशी भाजपा ने बनाया है।
भाजपा ने मेयर प्रत्याशी के लिए सभी अपने पार्षदों से 1 से 3 की प्राथमिकता में शील धाभाई, रश्मि सैनी और सुखप्रीत बंसल के नाम पर राय मांगी थी। इनमें अच्छी संख्या में पार्षदों ने पहले और दूसरे नम्बर पर रश्मि सैनी का नाम दिया।
भाजपा के जयपुर से जुड़े विधायकाें, विधायक का चुनाव लड़े प्रत्याशियों और सीनियर नेताओं से बातचीत में भी रश्मि सैनी का ही नाम सबसे ऊपर रहा। ज्यादातर नेताओं ने कुमावत-सैनी समाज को साधने के चलते रश्मि के नाम पर मंजूरी दी।
रश्मि सैनी और उनके परिवार का संगठन के तौर पर भाजपा से पुराना नाता है। रश्मि सैनी के पति राजेंद्र सैनी का संगठन में अच्छा दखल है। ऐसे में संगठन के पुराने सम्पर्क होने का फायदा भी रश्मि सैनी को मिलता दिखा। मेयर पद के लिए तीसरी दावेदार सुखप्रीत बंसल को उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का समर्थन था। इसके चलते कई बार उनका नाम चर्चा में आया। मगर जातिगत गणित और सीनियर नेताओं और पार्षदों के समर्थन के चलते सुखप्रीत को टिकट नहीं मिल सका।
रश्मि के टिकट के पीछे भाजपा के आंतरिक सर्वे का बड़ा रोल है। विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा के पूर्व सीनियर नेताओं के किए सर्वे में यह सामने आया था कि जयपुर की 8 विधानसभाओं से जुड़े दोनों निगमों के लगभग हर वार्ड में सैनी-कुमावत वोटर है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नगर निगम की 5 सहित जयपुर शहर से जुड़ने वाली 8 विधानसभाओं पर भाजपा ने सैनी कार्ड खेला है।
रश्मि सैनी को टिकट दिलवाले में भाजपा विधायक नरपत सिंह राजवी,संगठन महामंत्री चंद्रशेखर शर्मा और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी एवं भूमिका रही है। कार्यवाहक मेयर शील धाभाई का चयन कांग्रेस सरकार द्वारा किए जाने के कारण भी उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया । यह भी बात सही थी कि आने वाले समय में भाजपा की निर्वाचित होने वाली रश्मि सैनी अपने विवेक से काम नहीं करेंगे बल्कि विधायकों और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की कठपुतली बनकर ही काम करेंगी। यही कारण है कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों ने यह निर्णय दबाव डालकर कराया है।
वर्ष 1994 से अबतक 4 महिला मेयर सहित 10 मेयर रह चुके हैं। इनमें सिर्फ एक बार कांग्रेस का मेयर बना है। वर्ष1994 में जयपुर नगर निगम के पहले महापौर मोहनलाल गुप्ता थे। इसके बाद वर्ष1999 में निर्मला वर्मा मेयर बनीं। उनके निधन के बाद शील धाभाई को मेयर बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2004 में अशोक परनामी मेयर बने। मगर वर्ष 2008 में उनके विधायक बनने के बाद खाली हुई सीट पर पंकज जोशी को मेयर बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2009 में कांग्रेस से ज्योति खंडेलवाल मेयर बनीं। ये कांग्रेस के टिकट पर बनने वाली एकमात्र मेयर थी।
वर्ष 2014 में निर्मल नाहटा और फिर अशाेक लाहोटी मेयर बने। मगर वर्ष 2018 में विधायक का चुनाव जीतने के बाद खाली हुई सीट पर विष्णु लाटा मेयर बने। विष्णु लाटा ने चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था। मगर कांग्रेस के समर्थन से मेयर बने। इसके बाद जयपुर निगम निगम के दो भाग में बंटने पर जयपुर ग्रेटर नगर निगम की मेयर सौम्या गुर्जर बनी। उनके विवाद के बाद पहले निलंबन और बाद में बर्खास्त होने पर कांग्रेस सरकार ने भाजपा की पार्षद शील धाभाई को कार्यवाहक मेयर बनाया।