Saturday, 29 August 2026

लीज होल्डर्स -ट्रक ऑपरेटर्स के बीच बजरी दरों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोगों को मिल रही है महंगी बजरी


लीज होल्डर्स -ट्रक ऑपरेटर्स के बीच बजरी दरों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोगों को मिल रही है महंगी बजरी

राज्य खनिज विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने हाल ही में आमजन को बजरी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की दृष्टि से पूर्व में बजरी लीज की संख्या 12 से बढ़ाकर  28 की है। उनका दावा था कि अब मार्केट में आम लोगों को बड़े सस्ते मिलने लगेगी।। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया बजरी आज भी महंगे दामों पर बेची जा रही है और सरकार उन पर कोई कार्रवाई करने के बजाए चुप्पी साधे हुए है। 

आम आदमी महंगी बजरी खरीदने को मजबूर है। आरोप लगाया जाता है कि सरकार और लीज होल्डर की मिलीभगत से बजरी के दाम कम होने की वजह और बढ़ रहे हैं। सरकार के पास इसको लेकर कोई नीति नहीं है उसी का फायदा लीज होल्डर उठा रहे हैं।  

बजरी लीजधारक और ट्रक ऑपरेटर्स दोनों ही बजरी की दरें कम करने के मूड में नही है। दोनों की जिद के कारण आम लोगों को महंगी दरों से बजरी खरीदने कोमजबूर होना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय रहे दोनों के बीच दरों को लेकर सीधा-सीधा अब खनिज विभाग का हस्तक्षेप  नहीं होने से मनमानी की जा रही है। खनिज विभाग ने लीज देने के बाद इस मामले में कोई रेट कंट्रोल नीति नहीं होने के कारण आज भी लोगो के लिए मकान बनाना महंगा सौदा साबित हो रहा है।

बजरी लीज एलओआई होल्डर्स वेलफेयर समिति के अध्यक्ष नवल सिंह झराना का कहना है कि बजरी ट्रक ऑपरेटर्स अधिक मुनाफा कमाना चाहता है। उनका तर्क है कि राज्य खनिज विभाग ने हाल ही में पूर्व में बजरी की 12 लीज के अलावा नई 16 लीज बढ़ा करके अब 28 लीज  कर दी गई है ताकि बजरी ट्रकों को अब जयपुर तक पहुंचने के सफर में 100 से 125 किमी की बचत हुई है। 

उन्होंने बताया कि 2017 के पूर्व जीएसटी सहित अन्य शुल्क नही देने पड़ते थे लेकिन अब इनकी अदायगी के बाद भी वह टोंक बनास नदी से बजरी 650 रुपए प्रति टन के हिसाब से बजरी दी जा रही है। उसके बावजूद ट्रक ऑपरेटर्स जयपुर में महंगी बजरी बेच रहे है।

वही दूसरी तरफ ऑल राजस्थान बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष नवीन शर्मा का कहना है कि बजरी लीज होल्डर्स अधिक लाभ लेने के लिए बजरी के दाम  नहीं घटा रहे। जिनका कहना है कि खनिज विभाग की तरफ से बजरी लीज होल्डर्स के लिए दरें तय करने का कोई नियंत्रण  नहीं है, जिस कारण ये उपभोक्ताओं की जेब से मनमानी राशि वसूलने में लगे है। 

बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष शर्मा ने बताया कि यदि जीएसटी एवं डेड रेट आदि खर्चे को निकालने के बाद बजरी प्रति टन 200 रुपए की पड़ती है। लेकिन ट्रक ऑपरेटर्स से 700 रुपयों की वसूली की जा रही है ऐसे हालातों में आमजन को बजरी की दरों में कोई राहत नही मिल रही।

बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष नवीन शर्मा ने सीधा-सीधा  सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कोर्ट  की दुहाई देते हुए बजरी लीज धारकों को फ्री हैंड कर रखा है।

बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष शर्मा ने कहा है कि ट्रक ऑपरेटर्स को 700 रुपए प्रति टन बजरी दी जा रही है जब कि खींच करके टेक्स वगैराह मिला करके बजरी लीज होल्डर्स का खर्चा 200 रुपए आता है। उनका कहना है कि ट्रक ऑपरेटर्स का ट्रांसपोर्ट का छह सौ रुपए का ख़र्चा हो जाता है। वही ट्रक ऑपरेटर्स 50 लाख रुपए की गाड़ी रोड पर चलाता है जिसकी सवा-डेढ़ लाख की प्रति महीने किश्त भी चुकानी पड़ती है और टायर भी घिसते है ,टेक्स भी देना पड़ता है।इतना ही नही ड्राईवर की तनख्वाह भी चुकानी पड़ती है तो कम से कम ट्रक ऑपरेटर्स को 5-6 हजार रुपये का लाभ भी होना चाहिए। उन्होंने इस मामले में कहा कि सरकार को पहले की तरह बजरी की दरें फिक्स करनी चाहिए। लेकिन कोर्ट स्टे की दुहाई देते हुए मामले को लटका रखा है।

बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष शर्मा ने इस मामले में बजरी लीज होल्डर्स और सरकार के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि सात साल से सरकार स्टे को क्यों नही तुड़वा पाई एक कागज भी नही चलाया। बजरी लीज होल्डर्स एवं ट्रक ऑपरेटर्स के बीच अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में अब साधारण व्यक्ति को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।



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