Saturday, 29 August 2026

मैं एसएमएस में भर्ती था वहां गंदगी के हालात देख मुझे बड़ी शर्म आई: गहलोत


मैं एसएमएस में भर्ती था वहां गंदगी के हालात देख मुझे बड़ी शर्म आई: गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकारी अस्पतालों में गंदगी और जर्जर अस्पताल भवनों को लेकर पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाते हुए  उन्हें एक महीने में सर्वे करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की बिल्डिंग के रखरखाव का काम  सार्वजनिक निर्माण विभाग खुद आगे आकर करे। सीएम गहलोत ने  कहां की मैं खुद जब एसएमएस अस्पताल में भर्ती हुआ था और जिस वार्ड में मुझे रखा गया, मुझे बड़ी शर्म आई वहां पर। जिस प्रकार के वहां हालत थे। मेरे लिए तो वहां अलग से इंतजाम कर दिए।  लेकिन बाकी जो  मरीज थे, वे क्या-क्या कमेंट कर रहे थे गंदगी देखकर। क्या गंदगी थी वहां, मैं देखकर आया । उस समय मैंने हालात सुधारने को कहा था।

सीएम गहलोत ने गुरुवार को  मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यो की बैठक में अपनी पुरानी दास्तान को सुना कर सबको चौंका दिया।  उन्होंने पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव नवीन महाजन और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव वैभव गालरिया से कहा ​कि अस्पतालों की जर्जर बिल्डिंग का सर्वे का काम एक महीने में पूरा कर लीजिए। इसकी इसकी क्या प्राथमिकता है उसे तय करके मांग हमें भेजें जिससे कि आगामी बजट में इसे  राशि उपलब्ध कराई जा सके। 

सीएम गहलोत ने प्राइवेट अस्पतालों पर जमकर निशाना साधते हुए उन पर लूट मचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर निजी चिकित्सालयों को लूट मचाने की छूट नहीं  देगी।  उन्होंने कहा कि सरकार राइट टू हेल्थ का बिल लेकर आए थे, उसका भी प्राइवेट वालों ने विरोध किया। दूसरे राज्य के मरीज का एक्सीडेंट हो जाए तो उसका इलाज करना क्या हमारी ड्यूटी नहीं बनती ? उसमें इन्हें क्या तकलीफ हो रही है ? उसका ही प्राइवेट वाले विरोध कर रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल वालों को समझाना चाहिए के वे मानवीय दृष्टिकोण रखें। इतना पैसा कमाते हैं कुछ तो उन्हें सेवा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने इसे बिजनस बना रखा है, यह अच्छी बात नहीं है।

सीएम गहलोत ने कहा कि प्राइवेट अस्पताल में लूट करने की छूट नहीं दी जा सकती है। लूट मचा रखी है इन लोगों ने। हमें देखना पड़ेगा कि इनके कितने खर्चे आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज वाले आज लाखों में फीस लेते हैं। आप डॉक्टरों के बेटे बेटी जाते हैं तो भी कैपिटेशन फीस मांग लेते हैं वो लोग। पीजी करने में पता नहीं एक करोड़, दो करोड़ कितना लेते हैं। ऐसा माहौल बन गया है कि यह एक कमर्शियल धंधा हो गया है। प्राइवेट मेडिकल कॉलेज वाले बाद में यूनिवर्सिटी खोल लेते हैं, उन्हें कोई पूछ नहीं सकता। ये सब बातें देखनी चाहिए, इन्हें इतनी छूट नहीं दे सकते।

सीएम गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी थक गया। 1980 में मैं सांसद बनकर गया तब सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल चल रही थी कि कैपिटेशन फीस नहीं होनी चाहिए। उसवक्त लाख डेढ लाख होती थी, वह भी दूसरे राज्यों में होती थी, अपने यहां तो बहुत बाद में इसकी मंजूरी दी गई थी। उस वक्त जब लाख डेढ लाख कैपिटेश्यान फीस होती थी उस वक्त भी सुप्रीम कोर्ट ने रोकने की कोशिश की थी। अब सुप्रीम कोर्ट से पूछो अब वह फीस 50 लाख से एक करोड़, दो करोड़ और ज्यादा भी हो सकती है। हालात बड़े खराब हैं। हमें इस मुदृदे को देखना चाहिए।


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