Saturday, 29 August 2026

जयपुर के पूर्व राज परिवार ने अमावस्या की काली रात में काले कपड़े पहनकर उजाले की कामना की


जयपुर के पूर्व राज परिवार ने अमावस्या की काली रात में काले कपड़े पहनकर उजाले की कामना की

अमावस्या की काली रात में काले और नीले कपड़े पहनकर जयपुर का पूर्व राजपरिवार के सदस्य उजाले की कामना की। अंधकार से उजाले की ओर ले जाने वाला दीपोत्सव का यह पर्व सबकी जिन्दगी में खुशियां और उजाला लेकर आए यह कामना की गई। जयपुर के पूर्व राजपरिवार को भगवान राम का वंशज भी कहा जाता है, जो कछवाह वंश से हैं। 14 साल का वनवास पूरा करके और रावण का वध करके भगवान श्रीराम इसी अमावस्या पर सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। 

जयपुर की स्थापना करने वाले पूर्व राजा सवाई जयसिंह द्वितीय की तरह उनके वंशज भी हमेशा काले कपड़े पहनकर ही दीपावली मनाते आए हैं। पूर्व राजपरिवार की सदस्य पद्मिनी देवी, भाजपासांसद दीया कुमारी, पद्मनाभ सिंह, लक्ष्यराज सिंह, गौरवी सिंह शहीद परिवार के सदस्य आज भी इस परम्परा को निभाया।

एक युद्ध में हमारे कई पूर्वज वीरगति को प्राप्त हुए, उनको नमन करते हैं : दीया कुमारी

भाजपा सांसद और जयपुर की पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी ने कहा कि दीपावली के मौके पर 10 वीं या 11वीं शताब्दी में एक युद्ध हुआ था। इसमें पूर्व राजपरिवार के कई सदस्य वीरगति को प्राप्त हो गए थे। वो दीपावली की रात थी। इसलिए उनकी कुर्बानियों को याद करते हुए पीढ़ियों से हम सिम्बॉलिक रूप में रात को डार्क कपड़े पहनकर उन्हें नमन करते हैं। श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।  उन्होंने कहा कि दीपावली की रात को अमावस्या के कारण भी डार्क ही पहना जाता है। जहां तक मुझे याद है। पहले गहरा नीला ड्रेस पहनी जाती थी, बाद में काली ड्रेस भी पहनने लगे। काला या गहरा नीला पर कुछ ट्रेडिशनलकाम वाले कपड़े पहने जाते हैं।

भाजपा सांसद दीया कुमारी ने कहा कि मेरे दादा मानसिंह ने एक रूल बुक बनवाई थी। इसे हम ‘रेड बुक’ बोलते हैं। पोथीखाने में वह बुक मौजूद है।  पूर्व राजपरिवारों में इस तरह की रूल बुक चलती है। इसमें यह मेंशन किया होता है कि कौन से त्योहार और पर्व पर रॉयल फैमिली के सदस्यों को किस तरह की ड्रेस पहननी है। दादाजी खुद भी दीपावली की रात गहरा नीला और ब्लैक पहनते थे। हर त्योहार का कलर निर्धारित कर रखा है।

दीया कुमारी ने कहा कि हम कछवाह राजपूत वंश से हैं। भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास और लंका के राजा रावण का वध कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपक और रोशनी से जगमग हुई थी। कार्तिक अमावस्या को यह त्योहार अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने की खुशी में मनाया जाता है। मैं दीपावली के इस पावन मौके पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देती हूं।



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