


कांग्रेस शासित नगर परिषद टोंक बोर्ड के सभापति अली अहमद और आयुक्त अनिता खींचड़ के बीच आपसी विवाद और तबादलों को लेकर चल रही खींचतान से पूर्व डिप्टी सीएम एवं टोंक विधायक सचिन पायलट की छवि धूमिल हो रही है।वही राजनीतिक लोगो में ही नही बल्कि आमजन में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगर परिषद टोंक की आयुक्त अनिता खींचड़ की टोंक में हुई पहली नियुक्ति से ही सभापति अली अहमद के बीच सामंजस्य नही बैठ पाया,जिससे खफा होकर सभापति ने आयुक्त खींचड़ को टोंक से हटवा दिया। वही तहसीलदार रामधन गुर्जर को चार्ज दिलवा दिया। लेकिन कुछ ही महीनों बाद फिर अनिता खींचड़ ने टोंक आयुक्त का चार्ज सम्भाल लिया। जिससे नाराज सभापति ने येनकेन प्रक्रेणन आयुक्त का तबादला मकराना करवा दिया । लेकिन आयुक्त टोंक में ही डटी रही तो दीपावली अवकाश के आखिरी दिन सभापति अली अहमद ने आयुक्त को रिलीव का आदेश थमा दिया,तो आयुक्त ने कूटनीतिक चाल चलते हुए एक दिन पूर्व ही डीएलबी से मकराना तबादले के आदेश को वापिस लिए जाने के आदेश जारी करवा दिए।
नगर परिषद टोंक सभापति अली अहमद और आयुक्त अनिता खींचड़ के बीच चल रही तबादलों के आदेश की कशमकश में टोंक विधायक सचिन पायलट की व्यक्तिगत छवि खराब हो रही है।क्योंकि लोगो मे चर्चा है कि आयुक्त का तबादला पायलट के हस्तक्षेप से ही होता है। लेकिन फिर अगले दिन ही तबादला आदेश वापिस लिए जाने के डीएलबी के आदेश आ जाने से इस लड़ाई को सीएम अशोक गहलोत और पायलट के बीच विवाद से जोड़ा जा रहा है। ऐसे हालातों में न केवल पायलट की छवि पर विपरीत असर पड़ रहा है, बल्कि टोंक के विकास कार्य ठप्प पड़े हुए है। हालात यह है कि रोड़ लाइट बन्द पड़ी हुई है और वही दो महीनों से कचरा वेन मोहल्लों में नही जाने से गंदगी हो रही है। दोनों के बीच चल रही प्रतिष्ठा की लड़ाई का खमियाजा टोंक वासियों को भुगतना पड़ रहा है।