


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने कहा कि विशेष योग्यजन को समाज की मुख्य धारा में लाना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से विशेष योग्यजन के उत्थान एवं कल्याण के लिए कार्य करने की आवश्यकता जताई। श्री जूली ने कहा कि अधिकारी सुनिश्चित करें कि विशेष योग्यजन को राज्य सरकार द्वारा उनके लिए चलाई जा रही योजनाओं की समुचित जानकारी मिले, ताकि उन्हें योजनाओं का पूरा लाभ मिले। उन्होंने आम जन से इस बार दिवाली का त्योहार विशेष योग्यजन के साथ मनाने का आह्वान भी किया।
जूली मंगलवार को होटल क्लार्क्स आमेर जयपुर में निदेशालय विशेष योग्यजन तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016’ के प्रावधानों के तहत विशेष योग्यजन बच्चों के अधिकारों के संबंध में आयोजित 2 दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाग में ऐसा तंत्र विकसित हो, जिसमें विशेषयोग्यजन के पास योजनाओं का लाभ स्वतः ही पहुंचे, उन्हें इसके लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
राज्य आयुक्त, विशेष योग्यजन उमाशंकर शर्मा ने कहा कि विशेष योग्यजन के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाने के साथ साथ नवाचार भी किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की प्रेरणा से ‘राज्य आयुक्त आपके द्वार मिशन तहसील 392’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी तहसीलों में शिविर आयोजित कर उनके द्वारा व्यक्तिशः उपस्थित होकर विशेष योग्यजन की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत बीकानेर संभाग की 36 तहसीलों में शिविर आयोजित किये जाकर विशेष योग्यजन को लाभ पहुंचाया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सभी विशेष योग्यजन बच्चों को योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए सबसे पहले उनका चिह्निकरण किया जाना जरूरी है। इन बच्चों को आवश्यक उपकरण सभी समय पर मिलेंगे, तभी उन्हें मुख्यधारा में जोड़ा जा सकेगा और वे आम व्यक्ति की तरह जीवन में आगे बढ़ने के लिए सक्षम बनेंगे। उन्होंने कहा कि जब विशेष योग्यजन को समाज में समान स्थान और सम्मान मिलेगा तभी वे आगे बढ़ेंगे और प्रदेश के विकास में सहभागी बनेंगे।
कार्यशाला में आयोजित विभिन्न सत्रों में विशेष योग्यजन बच्चों के कल्याण के लिए ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016’ के तहत उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके जीवन को सुगम्य बनाने तथा उनके सशक्तिकरण के लिए किये गए प्रावधानों के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों तथा उनके समाधान पर संबंधित विभागों द्वारा प्रेजेंटेशन दिये गए तथा चर्चा की गई।
इस अवसर पर अतिरिक्त निदेशक निदेशालय, विशेष योग्यजन डॉ. नरेन्द्र चौधरी ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत विशेष योग्यजन बच्चों के अधिकारों के संबंध में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में यूनिसेफ की राज्य प्रमुख श्रीमती इजाबेल बर्डेम, विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधि के अतिरिक्त, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।