


जिले के चांदसिंह पुरा गांव में विज्ञान की शिक्षिका का तबादला क्या हुआ,मानो स्टूडेंट्स का कोई परिजन बिछुड़ गया हो। अपनी शिक्षिका के विदाई समारोह में छात्र और छात्राओं की आंखों से आंसुओ की धारा निकल पड़ी। इतना ही नही स्टूडेंट्स की आंखों से परिवार की तरह घुल मिल चुकी शिक्षिका अलका जांगिड़ की विदाई को 24 घण्टे बाद भी छात्राए भूल नहीं रही।
राजकीय सेवा में किसी शिक्षक का तबादला होकर दूसरे स्कूल में जाना तो किसी का आना यह तो चलता ही रहता है। ऐसे समय मे स्कूलों में तबादला होकर जाने वाले कि विदाई तो नए शिक्षक का स्वागत कार्यक्रम भी होता है।लेकिन टोंक जिले के देवली ब्लॉक के चाँदसिंहपुरा में विज्ञान शिक्षिका अलका जाँगिड़ का तबादला क्या हुआ मानो स्कूल ही नही बल्कि गांव में यह किसी टीचर्स का तबादला नही, गांव के किसी सदस्य के बिछुड़ने के समान हो गया। जब अलका जांगिड़ की विदाई हुई तो न सिर्फ छात्र और छात्राए बल्कि ग्रामीणों की आंखों से आंसू छलक पड़े। कार्यक्रम में एक से बारह कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी प्यारी शिक्षिका के तबादले से मायूस होकर विदाई कार्यक्रम में निकले आंसुओ को रोक नहीं पाए।
विदाई समारोह में बच्चे सिर्फ शनिवार को ही नहीं बल्कि रविवार को भी मायूस ही दिखाई दिए ,जिनको अपने परिवार की तरह स्नेह करने वाली शिक्षिका की जैसे ही याद आती है तो उनकी रुलाई फूट पड़ती है। ऐसा ही नजारा रविवार को भी गांव के बच्चों में देखा गया जिनको परिजन राजकीय सेवा में तबादले होने की बात समझा करके आंसू रोकने की कोशिश की।
विद्यालय के शिक्षक ,अभिभावक और खुद अलका जंगीड़ भी खुद के आंसुओ को रोक नहीं पाई। देखने के काबिल बात तो यह रही कि हर बच्चे ने अपने चहेती शिक्षिका को कोई न कोई भेंट अवश्य दी। वही सामूहिक रूप से अल्का का सम्मान करके उन्हें मालाओं से भी लाद दिया।
संस्था प्रधान व पी ई ई ओ नंदकिशोर मीना ने बताया कि गत 8 वर्षों से विज्ञान विषय की वरिष्ठ अध्यापक के रुप मे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चाँदसिंहपुरा में सेवाएं दे रही अलका जाँगिड़ का कार्य, व्यवहार और आचरण इस कदर उत्कृष्ठ रहा कि उन्होंने हर किसी के दिल में जगह बना ली।
शिक्षिका मंजू रानी और शारिरिक शिक्षक ओमप्रकाश जाट ने बताया कि अल्का जाँगिड़ ने अपने गृह जिले जयपुर के लिए स्थानातरण के लिए अर्जी लगाई थी, एक आदेश के तहत फ़िलहाल उन्हें सँयुक्त निदेशक कार्यालय जयपुर मंडल , जयपुर के लिए कार्यमुक्त करके शनिवार को देर शाम विदाई समारोह आयोजित किया ।
विद्यालय के खुशबू गुर्जर, शिवानी, टीना, सिमरन,तमन्ना, रामसिंह,राजपाल, इगराम सहित दर्जनों विद्यार्थियों ने रोते हुए बताया कि अल्का मेम के जाने से चाँदसिंहपुरा के स्कूल को एक अच्छी शिक्षिका की कमी सदैव खलती रहेगी।अब विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षण में भी बाधा आ रही है।
दुःखद पहलू ये भी है कि उनको अंग्रेजी पढ़ाने वाली प्रिय शिक्षका गरिमा कंवरिया का भी एक माह पूर्व बीकानेर स्थानांतरण हो गया था, तब से अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षक का भी पद रिक्त रहा है। इसके लिए शिक्षा मंत्री डॉ. बी डी कल्ला से पदों को अविलंब भरने की मांग की गई है।