


राजस्थान कांग्रेस में चल रहे राजनीतिक विवाह के बाद पहली बार शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बेल्लारी में राहुल गांधी से मुलाकात की। सीएम गहलोत ने राहुल गांधी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश जरूर की। लेकिन उनकी तरफ से कोई ज्यादा तर्जी नहीं दी गई। मौजूदा स्थिति में मामला अनुशासन समिति के समक्ष विचाराधीन है ऐसे में राहुल ने पेचीदा मामले में हस्तक्षेप करने की कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। राहुल से मुलाकात के दौरान संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे।
सीएम गहलोत को अभी तक यह आश्वासन नहीं मिल पाया है कि उनका जयपुर की घटना से कोई लेना देना नहीं है। राहुल ने जो दिशा निर्देश दिए थे उसके अनुपालना नहीं होने के कारण सीएम गहलोत की यह स्थिति बनी और वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तो दूर की बात है अब मुख्यमंत्री रह पाना भी मुश्किल हो गया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे लेकिन सीएम गहलोत की स्थिति पहले जैसी शनिवार को आमसभा में देखने को नहीं मिली। सीएम गहलोत ने जनसभा में राहुल गांधी की तारीफ की और उनका नेतृत्व सफल बताते हुए कहा आने वाले समय में कांग्रेस को निश्चित तौर पर कामयाबी मिलेगी।
सीएम गहलोत इस कोशिश में जुट गए हैं कि राहुल की तरफ से उन्हें अब कोई दिक्कत आने वाली नहीं है। लेकिन आज भी यह सवाल खड़ा हुआ है कि आखिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिशा निर्देशों की जयपुर में विधायक दल की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव क्यों नहीं पारित किया गया ?
बगावत करने वाले संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी तथा राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने समानांतर बैठक कर हाईकमान की खिलाफत क्यों की ! तीनों को अनुशासन समिति का नोटिस और अब जवाब भी प्रस्तुत हो गया है। लेकिन अभी तक अनुशासन समिति की बैठक संभव नहीं हो पाई है ऐसे में अब यही कहा जा रहा है कि 19 अक्टूबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो जाने के बाद राजस्थान के बारे में अनुशासन समिति की सिफारिश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विवाद के चलते ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के दोनों पदाधिकारी प्रचार-प्रसार करने जयपुर नहीं आए। दोनों प्रत्याशी प्रदेश के विवाद से दूर रहना चाहते थे और वह नहीं आए। इसी बीच सीएम गहलोत ने नियमों के विरुद्ध अध्यक्ष प्रत्याशी मलिकार्जुन खरगे का सोशल मीडिया के माध्यम से जोर शोर से प्रचार किया। इस बात से नाराज दूसरे प्रत्याशी शशी थरूर चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री से गहलोत के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी कर डाली। मामला अभी भी विवादित है समझौता नहीं हो पाया है आने वाले समय में क्या कुछ होगा कोई कहने की स्थिति में नहीं है !
प्रदेश में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और सीएम गहलोत अपने मर्जी के मुताबिक राजनीति कर रहे हैं। उन पर किसी प्रकार का कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि सचिन पायलट गुट के माध्यम से उनके द्वारा एक तरफा की जा रही नियुक्तियों की शिकायत भी हाईकमान तक पहुंचाई गई है। यह स्थिति स्पष्ट है कि अगर कोई कार्रवाई होगी तो निश्चित तौर पर बदलाव नहीं होगा लेकिन जो नियुक्तियां कर दी गई है उन्हें निरस्त करना मुश्किल हो पाएगा।
इस मुलाकात के बाद सीएम गहलोत ने बेल्लारी में राहुल गांधी की जनसभा में हिस्सा लिया। जनसभा में सीएम गहलोत ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ करते हुए भारत जोड़ो यात्रा के जरिए इतिहास बनाने वाला बताया। राजस्थान के विवाद के बाद गहलोत पहली बार राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए हैं।
अजमेर एसपी चुनाराम जाट ने दीपावली सहित आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ शनिवार को 3 थाना क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला। फ्लैग मार्च अलग-अलग बाजारों व चौराहों से होते हुए गुजरा और आम जनता को इस दौरान जागरूक किया गया। जिससे कि वह इस दीपावली के त्योहार को हर्षोल्लास के रूप में मना सके और सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए।