


कांग्रेस में बगावत के लिए जिम्मेदार माने गए संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, सरकारी मुख्य सचेतक जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी और राजस्थान पर्यटक विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ अनुशासन समिति के नोटिस का जवाब देने के बाद अपने मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 दिन के दिल्ली प्रवास के बाद शांति धारीवाल और धर्मेंद्र राठौड़ बेरुखी के साथ वापस लौट आए हैं। जबकि डॉ. जोशी दिल्ली में ही जुगाड़ करने की कोशिश में लगे हुए है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और अनुशासन समिति के अध्यक्ष एके एंटोनी अपने पक्ष को रखने के लिए विभिन्न नेताओं से संपर्क करने की कोशिश करते रहे लेकिन उन्हें कामयाबी हासिल नहीं मिली है । इससे यह नेता कुछ मायूसी और निराश है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन बंसल और अंबिका सोनी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। पवन बंसल अपने निर्धारित समय के अनुसार गुरुवार को दिल्ली नहीं पहुंचे और अंबिका सोनी के आंखों का ऑपरेशन होने के कारण दोनों नेताओं से मुलाकात नहीं हो पाई। तीनों नेता मुकुल वासनिक और भंवर जितेंद्र से मुलाकात करवाए हैं। लेकिन कोई बात नहीं बन पाई है इससे मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में अभी तक उन्हें अपना पक्ष और माफीनामा का संदेश हाईकमान और अनुशासन समिति तक पहुंचाने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के चुनाव की हलचल अब तेज हो गई है। जिसके चलते ही अनुशासन समिति की बैठक भी 19 अक्टूबर के बाद होने की संभावना है। ऐसे में राजस्थान में सत्ता और संगठन का पेचीदा मसला सुलझने की स्थिति नहीं बन पा रही है।
इन सबके बीच मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत ने गैर कानूनी तरीके से एआईसीसी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मलिकार्जुन खरगे का प्रचार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से प्रचार प्रसार करना भी तेजी से शुरू कर दिया है। जबकि चुनाव प्राधिकरण के अधिकारी मधुसूदन मिस्त्री ने यह प्रतिबंध लगाया था कि अगर कोई भी एआईसीसी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का प्रचार करेगा तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। ऐसे में सीएम गहलोत द्वारा बिना मुख्यमंत्री पद छोड़े ही मलिकार्जुन खरगे का प्रचार करना उनके लिए भारी पड़ सकता है।
कहने को तो सीएम गहलोत मलिकार्जुन खरगे के प्रस्तावक भी बने हैं ऐसे में उन्हें जयपुर में आने पर वोट देने वाले प्रतिनिधियों की बैठक बुलाने का अधिकार दिया हुआ है। अब राजस्थान में भी मलिकार्जुन खरगे और शशि थरूर के आने का कार्यक्रम बन रहा है। वहीं दूसरी ओर 17 अक्टूबर को अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा। इसकी तैयारियों को लेकर चुनाव अधिकारी राजेंद्र कुंपावतऔर एपीआरओ अनिल कुमार ने जयपुर में आकर अपनी व्यवस्थाओं का जायजा ले लिया है।
प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में एक ही सवाल खड़ा हुआ है कि आखिर सीएम गहलोत के भाग्य का फैसला क्या होगा ? सीएम गहलोत द्वारा मलिकार्जुन खरगे का प्रचार करने के पीछे आखिर क्या संदेश है इसका खुलासा तो वे खुद ही कर सकते हैं ! अब यह चर्चा जोरों पर है अनुशासन समिति बगावत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी तो निश्चित तौर पर राजनीति में एक नया उबाल आने की संभावना है। यह बात सही है कि राजनीति में जो होता है वह दिखता नहीं है और जो दिखता है वह होता नहीं है। अब बस एआईसीसी अध्यक्ष पद के निर्वाचन के बाद राजस्थान के पेचीदा मामले का पटाक्षेप हो पाएगा।