Saturday, 29 August 2026

सोनिया जी कांग्रेस संगठन और सत्ता की नाजुक स्थिति को संभालो, नहीं तो विस्फोट हो जाएगा !


सोनिया जी कांग्रेस संगठन और सत्ता की नाजुक स्थिति को संभालो, नहीं तो विस्फोट हो जाएगा !

कांग्रेस की राजनीति में एक पखवाड़े से गतिरोध चल रहा और खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रदेश के मसले को गंभीरता से लिया था और इसे सुलझाने के लिए पार्टी की अनुशासन समिति को यह मामला सौंप दिया था। इसके बाद मामला पेचीदा हुआ और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सोनिया गांधी के समक्ष अपने गलत  कृत के लिए माफी माननी पड़ी थी। इस माफी के साथ उन्होंने यह भी वादा किया था कि कांग्रेस की परंपरा को निभाने के लिए वे मुख्यमंत्री के निर्णय का अधिकार सोनिया गांधी को सौंपने के लिए 1 लाइन का प्रस्ताव पारित करा देंगे। यह प्रस्ताव अभी तक नहीं जा पाया है और पर्यवेक्षकों की वापस से बैठक भी नहीं हो पाई है।


प्रदेश के मामले में दोषी संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ महेश जोशी तथा राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने अनुशासन समिति को अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। अब तीनों अपने आरोपों को खारिज कराने के लिए दिल्ली में पार्टी के आकाओं के यहां हाजिरी लगा रहे हैं। राजसभा के सदस्य मुकुल वासनिक और राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र के माध्यम से अपनी सिफारिश सोनिया गांधी तक पहुंचाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।  इन दोनों नेताओं से बुधवार को तीनों ने लंबी मंत्रणा की है। स्थिति अभी तक काबू में नहीं आ पाई है।


प्रदेश कांग्रेस और सत्ता में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। दिखावे के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रशासनिक स्तर पर  फैसले और दौरे कर रहे हैं । सचिन पायलट ने भी संदेश देने के लिए कोटा संभाग का हाल ही में दौरा कर अपना शक्ति प्रदर्शन भी कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी ऐलान कर चुके कि आगामी 1 सप्ताह में 400 ब्लॉक अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर दिया जाएगा। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता नहीं है कि यह वादा पूरा कर पाएंगे।


अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के चुनाव पर प्रत्याशी मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर भी जयपुर के दौरे पर आने वाले हैं। इसके अलावा 17 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए चुनाव अधिकारी राजेंद्र कुमावत और  एपीआरओ अनिल कुमार गुरुवार को जयपुर आएंगे। स्थिति चाहे कैसी भी हो लेकिन मौजूदा वातावरण को ठीक नहीं किया गया तो आने वाले समय में पार्टी को मजबूती देना हाईकमान के समक्ष एक नई चुनौती  सामने आएगी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी इस मसले को राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले नहीं निपटा पाएंगी। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता गुटबाजी में बैठे हुए हैं और एक दूसरे को नीचा दिखाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।


विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी पार्टी के विधायकों द्वारा दिए गए सामूहिक इस्तीफे के बारे में  सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन गुपचुप में  वे भी मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और सीएम गहलोत के साथ रणनीति बनाने में व्यस्त हैं।


सोनिया गांधी के समक्ष यह बात रखी जा रही है कि सीएम गहलोत के हटाए जाने से  सरकार अस्थिर हो जाएगी। लेकिन यहां भी यह भी विश्लेषण करना आवश्यक है कि सीएम गहलोत कांग्रेस की जगह निर्दलीय और अन्य पार्टियों के विधायकों का सहारा लेकर अल्पकाल के लिए अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले अब सरदार शहर में उपचुनाव भी होगा और उप चुनाव को जीतने के लिए उनके परिवार के सदस्य को टिकट देना भी आवश्यक होगा। भाजपा की स्थिति इतनी मजबूत नहीं होगी ऐसे में कांग्रेस चुनाव जीतकर नया संदेश देने का काम भी कर सकती है।


प्रदेश में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का निर्णय अब अधिक समय तक नहीं लटकाए रखना चाहिए हाईकमान को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। नहीं तो पार्टी में बिखराव की स्थिति अधिक बढ़ेगी और आने वाले समय में यह पार्टी के हित में नहीं रहेगा। यह बात भी सही है कि दिसंबर में कांग्रेस की सरकार के 4 साल पूरे होंगे और इसी दौरान राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी राजस्थान में 21 दिन तक रहकर आगे के मुकाम के लिए आगे बढ़ेगी। सीएम अशोक गहलोत की भूमिका को भी स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है कि वे प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहेंगे या देश की। मामला पेचीदा है लेकिन हाईकमान विशेष ध्यान केंद्रित कर कर इस मामले को आपसी  समझाइश के माध्यम से सुलझाएगी तो निश्चित तौर पर कांग्रेस पार्टी को मजबूती देने का रास्ता खुलेगा।


प्रभारी अजय माकन को गहलोत गुट हटाने के लिए विभिन्न स्तर पर दांवपेच खेल रहा है अब उन्हें कितनी कामयाबी हासिल होगी यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा। प्रदेश में कांग्रेस और संगठन की स्थिति नाजुक है इस को संभालने के लिए हाईकमान और सीएम के साथ सचिन पायलट को भी बड़ा दिल रखने की जरूरत पड़ेगी नहीं तो स्थिति और विस्फोटक बनने की संभावना बनी रहेगी।


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