Saturday, 29 August 2026

अफीम नीति में किसानों को परम्परागत और सीपीएस पद्धति से खेती के लिए लाइसेंस देने का निर्णय, जारी होंगे 30 हजार नए लाइसेंस


अफीम नीति में किसानों को परम्परागत और सीपीएस पद्धति से खेती के लिए लाइसेंस देने का निर्णय, जारी होंगे 30 हजार नए लाइसेंस

केन्द्र सरकार ने घोषित अफीम नीति में  इस बार किसानों को परम्परागत और सीपीएस पद्धति से खेती के लिए लाइसेंस देने का निर्णय किया है। सीपीएस पद्धति से लाइसेंस के लिए किसानों को कई तरह की छूट दी गई है। इस कारण इस साल देश में करीब 30 हजार नए लाइसेंस जारी होने की संभावना है। 

अफीम नीति में पिछले वित्तीय वर्ष में 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से अधिक मार्फिन देने वाले किसानों को नियमित खेती का लाइसेंस जारी किया जाएगा, जबकि सीपीएस पद्धति से खेती के लिए 3 से 4.2 किलोग्राम तक प्रति हेक्टेयर मार्फिन की न्यूनतम औसत देने वाले किसानों को लाइसेंस मिलेगा। सभी को दस आरी का पट्टा मिलेगा। लाइसेंस की प्रक्रिया 9 अक्टूबर से शुरू होगी।

अफीम नीति में हर साल नीतियों में बदलाव के चलते दो दशक में देश में अफीम के किसानों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई। वर्ष 1999-2000 में देश में जहां इनकी संख्या करीब 1 लाख 60 हजार हो गई थी, वहीं पिछले साल इनकी संख्या लगभग 72 हजार रह गई। इनमें राजस्थान में किसानों की संख्या 33 हजार 550 थी।

अफीम नीति में देश में अफीम की खेती नारकोटिक्स विभाग के नियंत्रण और निगरानी में राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के चुनिन्दा जिलों में की जाती है। इस साल उत्तराखण्ड के दो जिलों में प्रायोगिक तौर पर खेती की अनुमति दी गई है। विभाग कड़े नियमों और शर्तों के साथ पात्र किसानों की सूची जारी करता है। अफीम की बुवाई नवम्बर से दिसम्बर के पहले पखवाड़े तक हो जाती है। अप्रेल में इसकी तुलाई होगी है।

अफीम उत्पादक किसान संघ राजस्थान प्रांतीय अध्यक्ष बद्रीलाल तेली मैं कहां की अफीम नीति में नारकोटिक्स विभाग 10 अक्टूबर से लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। इस साल 3 हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में देश में करीब 30 हजार नए किसानों को लाइसेंस मिल सकता है।


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