Saturday, 29 August 2026

सीएम गहलोत के राजनीतिक कैरियर पर दाग लगाने की पटकथा का रहस्यमई खुलासा, निर्णय सोनिया गांधी के हाथों में


सीएम गहलोत के राजनीतिक कैरियर पर दाग लगाने की पटकथा  का रहस्यमई खुलासा,  निर्णय सोनिया गांधी के हाथों में


25 सितंबर की दोपहर का समय  और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  पाक-भारत के सीमावर्ती इलाके में स्थित जैसलमेर में तनोट माता मंदिर के अमावस को दर्शन कर रहे थे। उन्हें यह पता नहीं था कि जयपुर में जो कुछ रणनीति बन रही है उससे उनका राजनीतिक भविष्य पर दाग लग जाएगा।  कांग्रेस हाईकमान द्वारा जयपुर में आयोजित विधायक दल की बैठक के लिए  रणनीति तैयार कर ली गई थी और उसी के मुताबिक कई विधायक जयपुर पहुंचे चुके थे, तो कुछ पहुंचने वाले थे। बाहर से यही लग रहा था कि सब कुछ कांग्रेस हाईकमान की लिखी स्क्रिप्ट के मुताबिक हो रहा है । सीएम गहलोत ने सही कहा है कि राजनीति में जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं । दोपहर में अचानक संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के फोन से कॉल  और राजस्थान पर्यटक विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर द्वारा  तैयार की गई  बगावत की नई रणनीति  पूरा खेल ही बिगाड़ दिया।

सीएम गहलोत के तीन सलाहकारों ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए  सीएम गहलोत   की 50 साल  स्वच्छ और ईमानदारी  की राजनीतिक के भविष्य को बिगाड़ दिया ? संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के फोन से हुए कॉल और कर्मचारियों की राजनीति करने वाले  सीएम  गहलोत के खास बने आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र  राठौड़ ने विधायकों को बगावत की राह पर  लाकर  खड़ा कर दिया ? अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी जिन्हें अपनी कुर्सी सौंपना चाहती थीं, आखिर ऐसी नौबत क्यों आ गई कि सीएम  गहलोत को माफीनामे तक जाना पड़ा ? 

सीएम हाउस में विधायक दल की बैठक में क्या स्टैंड रखना है, माकन-खड़गे के सामने क्या बोलना है ? इसकी तैयारी 25 सितंबर की सुबह से ही गहलोत गुट के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों में चल रही थी। सभी विधायकों को मुख्यमंत्री निवास पर शाम 7 बजे दोनों ऑब्जर्वर के साथ होने वाली विधायक दल की मीटिंग की पहले से सूचना दी जा चुकी थी।

इस बीच दोपहर में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल मंत्री के एक फोन कॉल ने पूरे घटनाक्रम को अचानक बदल दिया। हालांकि फोन मंत्री का था, लेकिन बात  आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने की। इसी के बाद तय हुआ कि धारीवाल के घर पहले गहलोत गुट के विधायकों की बैठक होगी।

संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल के सरकारी निवास पर सबसे पहले  सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ.महेश जोशी और  सरकारी उप सचेतक महेंद्र चौधरी धारीवाल के पास पहुंचे। इसके बाद ही सभी विधायकों को पांच बजे संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल के  सरकारी बंगले पहुंचने के लिए बुलाने का सिलसिला शुरू हुआ। फिर यहां से विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी के घर जाकर इस्तीफे सौंपने की रणनीति बनाई गई। यहीं तय हुआ कि किसी भी हालत में सचिन पायलट को सीएम नहीं बनने दिया जाएगा।

इस घटनाक्रम का नतीजा यह हुआ कि गांधी परिवार के विश्वस्त माने जाने वाले मुख्यमंत्री गहलोत की राजनीतिक छवि को नुकसान हुआ और यह माना जाने लगा कि सीएम गहलोत अपनी कुर्सी को छोड़ने के लिए कतई तैयार नहीं हैं। इस बीच पांच दिन तक  गुटबाजी में बंटी कांग्रेस के नेताओं की तरफ से लगातार बयानों की बौछारों के बीच गुरुवार को दिल्ली में सोनिया गांधी के साथ मुलाकात में सीएम गहलोत को पार्टी की हुई किरकिरी से आहत होकर सिर झुकाकर माफी मांगनी पड़ी। यही नहीं उन्हें यह भी कहना पड़ा कि अब सीएम की कुर्सी के फैसले के लिए भी  सोनिया गांधी को अधिकृत  करना पड़ा।

आरटीडीसी  अध्यक्ष धर्मेंद्र  राठौड़ चयरमैन होने के बावजूद विधायकों की संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल के घर  बैठक कराने के पीछे पूरी योजना बनाई और धारीवाल के घर से  विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी के घर तक विधायकों को पहुंचाने के लिए बस सहित सारे लॉजिस्टिक इंतजाम आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने किए। पार्टी ने धर्मेंद्र राठौड़ को इसके लिए अनुशासनहीनता का दोषी करार देते हुए नोटिस देकर जवाब मांगा है।

 संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने नोटिस मिलने से पहले प्रेस वार्ता कर प्रभारी अजय माकन पर सीधे आरोप लगाए थे। धारीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि अजय माकन षड्यंत्रपूर्वक सचिन पायलट के नाम का प्रस्ताव पास कराना चाहते थे। उनसे जब पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हां मैं सीधे तौर पर इस मामले में अजय माकन पर आरोप लगा रहा हूं।'

इस पूरे घटनाक्रम के बाद  सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के भी कई बयान सामने आए। इनमें महेश जोशी ने पायलट गुट पर लगातार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक पहले भी होती रही है। विधायक दल की बैठक में व्यक्तिगत रायशुमारी का एजेंडा अलग से होता है।  सीएमका चयन हो या विधायक दल का नेता बदलना है तो उसके लिए रायशुमारी होती है, लेकिन जिस बैठक में कोई एजेंडा ही नहीं हो तो अलग से रायशुमारी करने की बात कैसे सोच सकते हैं।

आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ भी इस पूरे मामले में आक्रामक नजर आए। राठौड़ ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रभारी अजय माकन पर निशाना साधा।  आरटीडीसी के अध्यक्ष राठौड़ ने माकन को गद्दार बताया। राठौड़ ने कहा कि माकन ने हाईकमान को गुमराह किया और वे षड़यंत्र रच रहे थे। इसके अलावा पायलट गुट के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी को भी गद्दार बताया।

पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो बगावत की पटकथा लिखने वाले मंत्री पूरे मामले को तकनीकी पहलू में फंसाने की कोशिश करते रहे। जब पत्रकारों ने उनसे समानांतर बैठक के बारे में पूछा तो उन्हाेंने इससे इनकार कर दिया और कहा कि विधायक आते गए और बात आगे बढ़ती गई। हमने कोई बैठक नहीं बुलाई, न शामियाने लगाए। विधायकों ने भी जो इस्तीफे दिए, उसमें कहीं कुछ ऐसा नही लिखा, जिसको पढ़कर स्पष्ट हो कि आखिर वे इस्तीफा क्यों दे रहे हैं।

24 सितंबर : इसी दिन यह तय हुआ था कि राजस्थान को लेकर 25 सितंबर को विधायक दल की बैठक होगी। इसके लिए पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को नियुक्त किया गया। दोनों 25 को हाईकमान का प्रस्ताव पारित कराएंगे।

25 सितंबर : विधायक दल की बैठक से तीन घंटे पहले से ही संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के घर विधायक इकठ्‌ठा होना शुरू हुए। शांति धारीवाल के घर पर विधायकों की एक  समानांतर बैठक हुई। बैठक में निर्णय हुआ कि विधायक विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को इस्तीफा सौंपेंगे। इस दौरान कई विधायक  सीएम हाउस में भी एकत्रित हुए। मगर विधायक दल की बैठक नहीं हो पाई। इसके बाद कई विधायक विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. सीपी जोशी के घर पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में ऐसा कुछ नहीं लिखा था कि जिसको पढ़कर स्पष्ट हो कि आखिर वे इस्तीफा क्यों दे रहे हैं।

26 सितंबर : दोनों पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली रवाना हो गए। दोनों पर्यवेक्षकों ने इस घटना को अनुशासनहीनता करार दिया। दिल्ली जाकर दोनों ने  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारीअध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। सोनिया से मिलने के बाद अजय माकन ने राजस्थान में हुए घटनाक्रम को लेकर तीखी आलोचना की।

27 सितंबर : पर्यवेक्षकों ने राजस्थान घटनाक्रम पर लिखित रिपोर्ट  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपी। इस दौरान सचिन पायलट दिल्ली चले गए। घटनाक्रम को लेकर कई विधायकों के अलाकमान के समर्थन में बयान आते रहे। वहीं रात को पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर  संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल,  सरकारी मुख्य सचेतक और जलदाय मंत्री डॉ.महेश जोशी और आरटीडीसी  अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में तीनों को घोर अनुशासनहीन बताया और 10 दिन में जवाब मांगा गया।

28 सितंबर :  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधीको लेकर नए सिरे से चर्चाएं और बैठकों का दौर शुरू हुआ। दिनभर  सीएम अशोक गहलोत के दिल्ली जाने की चर्चाएं चली। दोपहर में  मुख्यमंत्री निवास पर लगभग 20 विधायक-मंत्री  सीएम गहलोत से मिले। इसके बाद देर रात बिन बुलावे के सीएम गहलोत दिल्ली पहुंचे। वहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी में आंतरिक छोटी मोटी घटना बताकर इसे सुलझा लेने का दावा किया था।

29 सितंबर : मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम सांसद दिग्विजय सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने की घोषणा की। दूसरी तरफ सांसद मुकुल वासनिक, केसी वेणुगोपाल और प्रमोद तिवारी के माध्यम से सीएम गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की  कार्यकारी अध्यक्ष  सोनिया गांधी से काफी मन्नतो  के  बाद सीएम गहलोत को समय मिला।  सीएम गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से अल्पकालीन मुलाकात करते हुए सारी घटनाक्रम के लिए माफी मांगी और सीएम के निर्णय के लिए भी उन्हें अधिकृत करने की बात कहकर  यह वादा करते हुए आएगी आने वाले समय में विधायक दल की बैठक में कांग्रेस की पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए सीएम पद के निर्णय का अधिकार भी हाईकमान को सौंपने का प्रस्ताव पारित कर आएंगे। सीएम गहलोत ने सोनिया गांधी के निवास के बाहर ही स्पष्ट तौर पर कहा कि वह इस गलत कार्य के लिए खुद को दोषी मानते हुए सोनिया गांधी से माफी मांग कर आए हैं और वादा किया है कि आने वाले समय में विधायक दल की बैठक में सोनिया गांधी को निर्णय करने का प्रस्ताव पारित कर  कराएंगे।

पार्टी के संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों को कहा था कि मुख्यमंत्री का फैसला भी एक-दो दिन में कर लिया जाएगा। वादे के मुताबिक फैसला नहीं हो पा रहा है अब नई स्थितियां पैदा हो गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव शुरू हो गया है। प्रचार प्रसार के लिए प्रत्याशी मलिकार्जुन खरगे और शशि थरूर राज्यों में जाने की तैयारी कर रहे हैं। उसी के तहत प्रदेश में भी 11 अक्टूबर को मलिकार्जुन खरगे प्रचार करने आएंगे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 400 निर्वाचित सदस्य 17 अक्टूबर को अध्यक्ष पद के लिए अपना मतदान करेंगे और 19 अक्टूबर को इसका फैसला हो जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि अब राजस्थान के मुख्यमंत्री का फैसला भी 19 अक्टूबर के बाद ही संभव हो सकेगा। 

मौजूदा स्थिति में यह भी बात सही है कि आगामी 2 दिन में राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के बारे में कोई निर्णय सीधा भी किया जा सकता है। और उस निर्णय की  अनुपालन के लिए विधायक दल की बैठक आयोजित की जा सकती है। मामला पेचीदा है इसके कारण रणनीति बड़ी सोच समझ के तैयार की जा रही है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिस तरह की बयानबाजी की है उससे  मामला और उलझता नजर आ रहा है ।


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