


.jpg)
डाइबिटीज विशेषज्ञ एवं एप्रोप्रिएट डाइट थेरेपी सेंटर, नागपुर के संस्थापक निदेशक डॉ. एस. कुमार ने डाइबिटीज से मुक्ति के लिए देश से शुगर मुक्त की मुहिम चला रखी हैं। शुगर जैसी बीमारी के बढते प्रकोप लेकर उनके द्वारा किए गए कार्यों और उपायों के बारे में विस्तार से चर्चा की ।
क्या कारण है कि आज भारत में ही नहीं, विश्व में मधुमेह एक बड़ी समस्या है ?
डॉ कुमार ने कहा कि तेजी से बदलती जीवनशैली, खानपान, तनावपूर्ण जीवन जैसे कारणों ने शुगर जैसी बीमारी को जन्म दिया है। यही कारण है कि शुगर सिर्फ बड़ों को ही नहीं, बच्चों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट बताती है कि विश्व भर में आज 422 मिलियन लोग शुगर के मरीज हैं। उन्होंने कहा कि शुगर को लेकर 90 प्रतिशत लोगों में भ्रम की स्थिति है और उन्हें पूरी जानकारी नहीं होती।
डॉ कुमार ने कहा कि एलोपैथिक दवाओं के बजाय डाइट थेरेपी शुगर मरीजों के लिए सबसे अधिक कारगर है। एलोपैथिक दवाएं अत्यधिक नुकसानदेह हैं। ये दवाएं मरीजों के दूसरे अंगों को घातक नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए सही ट्रीटमेंट से इसका निदान संभव है।
डाइबिटीज का मानव शरीर पर इन सबका प्रभाव कैसे पड़ता है ?
डॉ. कुमार ने कहा कि हमारे शरीर के अग्नाश्य में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण खून में ग्लूकोज स्तर समान्य से अधिक बढ़ जाता है तो उस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है। इन्सुलिन एक हॉर्मोन है जो पाचक ग्रन्थि द्वारा बनता है और जिसकी जरूरत भोजन को एनर्जी बदलने में होती है। इस हार्मोन के बिना हमारा शरीर शुगर की मात्रा को कंट्रोल नहीं कर पाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा लेने में काफी कठिनाई होती है। जब ग्लूकोज का बढ़ा हुआ लेवल हमारे रक्त में लगातार बना रहता है तो यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है जिसमें आंखें, मस्तिष्क, हृदय, धमनियां और गुर्दे भी चपेट में आ जाते हैं।
क्या यह आनुवांशिक रोग है ?
डॉ. कुमार ने कहा कि डायबिटीज एक आनुवांशिक रोग है यानी अगर किसी के माता पिता को डायबिटीज है तो उनके बच्चों को भी मधुमेह होने की सम्भावना ज्यादा होती है।
डाइबिटीज का आजकल के खानपान का किस तरह असर पड़ता है ?
डॉ. कुमार ने कहा कि आजकल युवाओं, बच्चों में जंक फूड खाने का चलन बढ गया है। जंक फ़ूड या फास्ट फूड खाने वाले लोगों में मधुमेह की सम्भावना ज्यादा रहती है, क्योंकि इस तरह के खाने में वसा ज्यादा पाया जाता है, जिससे शरीर में कैलोरीज की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है और मोटापा बढ़ता है। इसके कारण इन्सुलिन उस मात्रा में नहीं बन पाता, जिससे शरीर में शुगर लेवल में बढ़ोतरी होती है।
क्या डाइबिटीज कोई अन्य कारण भी आते हैं ?
डॉ. कुमार ने कहा कि अधिक शारीरिक श्रम न करना, मानसिक तनाव और डिप्रेशन, गर्भावस्था, ज्यादा दवाइयों का सेवन, ज्यादा चाय, दूध, कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे के सेवन, धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन शुगर के प्रमुख कारण हैं।
शुगर से बचने के लिए क्या सलाह देंगे ?
डॉ. कुमार ने कहा कि चाहे बड़े-बूढे हों या जवान, शारीरिक मेहनत जरूर करें। वह चाहे व्यायाम हो या अन्य कोई भी शारीरिक परिश्रम। दिनचर्या को व्यवस्थित रखें। फास्ट फूड से बचे। खानपान का संयम रखें। परहेज और पथ्य का सेवन करें। डाइट थेरेपी ही डाइबिटीज का बेहतरीन इलाज है।