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प्रदेश में ओबीसी के 21 फीसदी आरक्षण में विसंगतियों को लेकर पंजाब प्रभारी और कांग्रेस हरीश चौधरी और विधायक दिव्या मदेरणा अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ हजारों युवाओं के साथ धरने पर बैठ गए। उनका साथ देने के लिए सरकार का समर्थन कर रहे बहरोड़ से निर्दलीय विधायक बलजीत यादव भी आंदोलन में शामिल हो गए।
प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच इस मामले को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गंभीरता से लिया और 2 दिन बाद में ही वर्ष 2018 में जारी परिपत्र में संशोधन के आदेश दे दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख शासन सचिव कुलदीप राका और विभागीय अधिकारियों ने आंदोलन करने वाले हरीश चौधरी और विधायक यादव सहित संघर्ष समिति के राजस्थान जाट महासभा प्रदेशाध्यक्ष और किसान नेता राजाराम मील को बुलाकर समझौता वार्ता की। सीएम गहलोत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मामला लटकाए नहीं जाए इसमें न्याय होना चाहिए।
शुक्रवार को हरीश चौधरी ने जयपुर के शहीद स्मारक पर सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक हमारा हक और अधिकार नहीं मिलेगा, यह संघर्ष जारी रहेगा। किसान नेता और जाट महासभा प्रदेशाध्यक्ष राजाराम मील ने कहा कि प्रदेश में सालों से ओबीसी वर्ग के साथ ज्यादती हो रही है। आज एक दिन का धरना देकर सरकार को चेतावनी दी जा रही है। अगर जल्द ही ओबीसी आरक्षण की विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो किसान आंदोलन की तरह शहीद स्मारक पर हजारों की संख्या में ओबीसी वर्ग धरना देगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कहा कि ओबीसी आरक्षण विसंगति को लेकर युवा आंदोलन पर हैं। इस विषय पर आज ओबीसी आरक्षण बहाल करो के प्रतिनिधि दल के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई बैठक में हिस्सा लेकर इस विसंगति को दूर करने की पॉजिटिव चर्चा की गई। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार जल्दी न्यायोचित निर्णय लेगी।
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि वर्ष 2018 के डीओपी के परिपत्रऔर भूतपूर्व सैनिकों के संबंध में गलत दृष्टि के कारण 21 फीसदी आरक्षण ओबीसी को होने के बावजूद भी शून्य पद हमें मिल रहे हैं। पिछली भर्तियों के नतीजों में यह पता चला है। हमारे साथ अन्याय हो रहा है। हम तब्दीली चाहते हैं। महिला आरक्षण की तर्ज पर भूतपूर्व सैनिकों के आरक्षण की व्यवस्था हो और सही रोस्टर के आधार पर नियुक्तियां दी जाएं। 2018 के बाद जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाए। जब तक हमारा हक और अधिकार नहीं मिलेगा, यह संघर्ष जारी रहेगा।