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राजस्थान सरकार द्वारा पारिवारिक न्यायालय के क्षेत्राधिकार को कम करके एडीजे सांगानेर को पारिवारिक न्यायालय का क्षेत्राधिकार दिया गया है। उससे वकीलों और पक्षकारों में काफी रोष है और वे आंदोलन कर रहे हैं और पारिवारिक न्यायालय में कोई काम नहीं हो रहा है सभी अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक संघर्ष समिति गठन जिसमें पूनम चंद भंडारी, डी एस शेखावत, विष्णु शर्मा, गीता शर्मा, अजीत सिंह लूनिया, महेश चावला, भारती चतुर्वेदी, भावना शर्मा और आलोक सोनी को जिम्मेदारी दी गई है। संघर्ष समिति के संयोजक पूनम चंद भंडारी ने बताया कि पारिवारिक न्यायालय अधिनियम 1984 में पारित हुआ था और इस अधिनियम के तहत पारिवारिक न्यायालय का गठन किया गया क्योंकि इसमें पारिवारिक विवाद आते हैं। इसलिए इनको दूसरे न्यायालयों से अलग रखा है। वर्ष 1986 में जयपुर में पहला पारिवारिक न्यायालय स्थापित किया गया और आज जयपुर में गांधीनगर मोड पर पांच पारिवारिक न्यायालय काम कर रहे हैं और पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन के अथक प्रयासों से राज्य सरकार ने पक्षकारों की सुविधाओं को देखते हुए गांधीनगर मोड़ टोंक रोड पर करीब 4000 गज जमीन का आवंटन किया है अब वहां पर शीघ्र ही आधुनिक पारिवारिक न्यायालय के भवन का निर्माण होगा। लेकिन राजस्थान सरकार ने एक नोटिफिकेशन के जरिए पारिवारिक न्यायालय का बहुत सारा क्षेत्राधिकार एडीजे कोर्ट सांगानेर को दे दिया गया है जो कि अवैध है। जबकि सांगानेर में पारिवारिक न्यायालय नहीं है और वहां पर काउंसलिंग रुम नहीं है महिलाओं बच्चों के बैठने के लिए स्थान नहीं है। एडीजे कोर्ट में पहले से ही बहुत ज्यादा काम है और यह पारिवारिक न्यायालय अधिनियम की धारा 8 के खिलाफ है पूर्व में भी 2015 में इसी तरह का एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था तब पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी एस शेखावत और पूनम चन्द भंडारी एडवोकेट न हाई कोर्ट और सरकार को मिलकर बताया था कि पारिवारिक न्यायालय के मुकदमे एडीजे कोर्ट में स्थानांतरित नहीं किए जा सकते हैं गलती स्वीकार की गई वर्ष 2016 में सरकार ने गलती मानते हुए उस अधिसूचना को वापस ले लिया था। लेकिन अब अचानक वर्ष 2015 की अधिसूचना की निरंतरता में नई अधिसूचना जारी कर दी गई जो अवैध है क्योंकि 2015 के अधिसूचना पूर्व में ही निरस्त हो चुकी है। जब पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन को 26 अगस्त 2022 की अधिसूचना की जानकारी हुई तो एक प्रतिनिधि मंडल जिसमें पूनम चंद भंडारी एडवोकेट, डी एस शेखावत विष्णु शर्मा और गीता शर्मा थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव से मिले और आधा घंटे उनसे विस्तृत चर्चा हुई उन को ज्ञापन दिया गया और उन्होंने भी इस बात को माना की गलती हुई है और यह भी कहा कि इस पर विचार किया जाएगा। उसके पश्चात एक शिष्टमंडल पूनम चंद भंडारी डी एस शेखावत विष्णु शर्मा और अजीत सिंह लूनिया के साथ प्रमुख सचिव विधि प्रवीणभटनागर से मिले उनको भी ज्ञापन दिया।उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश को इससे अवगत कराया जाएगा और उनके निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा। लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया इसलिए पक्षकारों और अधिवक्ता गण ने पहले 1 दिन का सांकेतिक आंदोलन किया । मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन दिया गया था कि रविवार तक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो सोमवार से आंदोलन को तेज किया जाएगा। सोमवार कोपारिवारिक न्यायालय के गेट के बाहर सभी अधिवक्ताओं और पक्षकारों ने धरना दिया और पारिवारिक न्यायालय में कोई काम नहीं हुआ सभी मुकदमों में तारीख पेशी दे दी गई।