Wednesday, 26 August 2026

बुटाटी धाम मंदिर में करीब 22 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी, कोर्ट के आदेश पर पूर्व अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों पर मुकदमा


बुटाटी धाम मंदिर में करीब 22 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी, कोर्ट के आदेश पर पूर्व अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों पर मुकदमा

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कुचेरा। नागौर जिले के प्रसिद्ध बुटाटी धाम स्थित श्री चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति में करीब 22 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर कुचेरा पुलिस थाने में समिति के निर्वतमान अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़ पुत्र चंदन सिंह, निवासी बुटाटी सहित अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

ग्रामीण जयपाल सिंह राठौड़, सुशील चोयल, सुखराम चोयल, कानाराम भाणवाल सहित अन्य की ओर से पेश परिवाद के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।

पूर्व अध्यक्ष समेत समिति पदाधिकारियों पर आरोप

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र सिंह राठौड़ तीन वर्षों तक मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष रहे और इस दौरान मंदिर प्रबंधन, बैंक खातों, दान पेटियों, रसीद पुस्तकों, खरीद, भुगतान और लेखा अभिलेखों से जुड़े कामकाज में उनकी प्रभावी भूमिका रही। आरोप है कि जिला मजिस्ट्रेट नागौर की ओर से गठित जांच समिति की पड़ताल में कई तरह की वित्तीय विसंगतियां और रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं।

दान राशि और रसीद रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप

परिवाद के अनुसार जांच के दौरान समिति ने पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया। दान राशि, रसीदें, भुगतान और लेखा दस्तावेजों में कई विसंगतियां पाए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि करीब 40 लाख रुपए के दान का समुचित लेखांकन नहीं मिला, जबकि लगभग 2219 रसीदों का रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं था।

सोना-चांदी के रिकॉर्ड पर भी सवाल

मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिवाद में कहा गया है कि सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य सामग्री के रिकॉर्ड तथा वास्तविक उपलब्धता में अंतर पाया गया।

जांच में करीब 35.500 किलो चांदी अतिरिक्त खरीदने का भी आरोप है। परिवाद में सोना-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब 2 करोड़ 60 लाख 75 हजार रुपए बताया गया है।

भोजनशाला निर्माण और रसोई खर्च भी जांच के घेरे में

परिवाद में आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भोजनशाला निर्माण के नाम पर करीब 49 लाख 49 हजार 693 रुपए का खर्च दर्शाया गया, लेकिन मौके पर उस अनुपात में काम नजर नहीं आया। इसी तरह रसोई संचालन के नाम पर करीब 1 करोड़ 17 लाख 63 हजार 933 रुपए के खर्च को भी संदिग्ध बताया गया है।

CCTV, गौशाला और ग्राम विकास खर्च पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने ग्राम विकास के नाम पर किए गए भुगतान, CCTV कैमरों की खरीद और गौशाला समिति को दी गई राशि में भी अनियमितता के आरोप लगाए हैं। इन सभी मदों को मिलाकर करीब 22 करोड़ रुपए तक की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। हालांकि वास्तविक गबन की राशि पुलिस जांच और वित्तीय ऑडिट के बाद ही स्पष्ट होगी।

BNS की इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

कुचेरा पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 316(5), 336(2), 338, 305(ए) एवं 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस अब मंदिर समिति के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, दान पेटियों, रसीद पुस्तकों, खरीद-बिक्री के दस्तावेजों और बहुमूल्य संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगी।

जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

फिलहाल सभी आरोप परिवाद और प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं। संबंधित पदाधिकारियों की आपराधिक जिम्मेदारी पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। मंदिर जैसे बड़े धार्मिक संस्थान से जुड़ा मामला होने के कारण स्थानीय स्तर पर भी इस प्रकरण को लेकर काफी चर्चा है।

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