



10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाओं के प्रमुख पदों का तय होगा आरक्षण, 41 जिला परिषदों में भी निकलेगी जिला प्रमुख पदों की लॉटरी
जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों से पहले आरक्षण की तस्वीर लॉटरी के जरिए तय होगी। प्रदेश में पहले शहरी निकाय चुनाव कराए जाएंगे, लेकिन शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के आरक्षण की लॉटरी एक साथ निकाली जाएगी।
प्रदेश के कुल 309 शहरी निकायों में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं। इन निकायों में मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों का आरक्षण लॉटरी के माध्यम से निर्धारित किया जाएगा।
प्रस्तावित आरक्षण व्यवस्था के अनुसार 309 नगरीय निकायों में से 60 निकाय प्रमुख पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। इनमें सबसे ज्यादा 19 पद जयपुर संभाग में ओबीसी वर्ग के हिस्से में आएंगे। इसके अलावा 50 निकायों में प्रमुख पद एससी और 11 निकायों में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया में सबसे पहले एससी वर्ग के लिए पदों का निर्धारण किया जाएगा। महिला आरक्षण भी निर्धारित नियमों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में लागू किया जाएगा, जिससे संबंधित निकायों में महिला प्रत्याशियों के लिए प्रमुख पद तय होंगे।
प्रदेश के 10 नगर निगमों में मेयर पदों के आरक्षण का फैसला भी इसी लॉटरी से होगा। इसके साथ 51 नगर परिषदों में सभापति और 248 नगरपालिकाओं में चेयरमैन पद का आरक्षण तय किया जाएगा।
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही राजनीतिक दलों में उम्मीदवार चयन और टिकट दावेदारी का गणित भी बदल जाएगा। जिन निकायों में पद किसी विशेष वर्ग अथवा महिला के लिए आरक्षित होगा, वहां उसी श्रेणी के दावेदार चुनावी मैदान में प्रमुखता से सामने आएंगे।
पंचायतीराज संस्थाओं के तहत प्रदेश की 41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख पदों का आरक्षण भी लॉटरी से निर्धारित किया जाएगा। इनमें 8 जिला प्रमुख पद एससी, 7 एसटी और 5 ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने हैं। शेष पदों पर अन्य आरक्षण श्रेणियों और सामान्य वर्ग की स्थिति लॉटरी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
निकाय प्रमुखों के साथ नगर निकायों के वार्डों तथा पंचायतीराज संस्थाओं में अलग-अलग पदों पर एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण का निर्धारण भी किया जाएगा। जिला स्तर पर निकायवार और ग्राम पंचायतवार आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्याशियों की वास्तविक चुनावी तस्वीर साफ होगी।
ओबीसी आरक्षण के लिहाज से जयपुर संभाग सबसे महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि यहां सबसे ज्यादा 19 निकाय प्रमुख पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने हैं। इसके चलते जयपुर संभाग के विभिन्न नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में राजनीतिक दावेदारी का नया समीकरण बन सकता है। आरक्षण लॉटरी के बाद भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों को वार्ड और निकाय स्तर पर अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी।