Saturday, 08 August 2026

मुख्यमंत्री ने लोक अभियोजकों एवं विधि अधिकारियों से किया संवाद: अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने में लोक अभियोजकों की अहम भूमिका: भजनलाल शर्मा


मुख्यमंत्री ने लोक अभियोजकों एवं विधि अधिकारियों से किया संवाद: अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने में लोक अभियोजकों की अहम भूमिका: भजनलाल शर्मा

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मजबूत कानून-व्यवस्था और सुलभ न्याय से सुशासन की संकल्पना हो रही साकार, जनहित के प्रकरणों में प्रभावी पैरवी और त्वरित निस्तारण पर दिया जोर

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था और सुलभ न्याय के माध्यम से आमजन में सरकार के प्रति विश्वास मजबूत होता है और इससे प्रदेश में सुशासन की संकल्पना साकार होती है। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिनकी न्यायालयों में सरकार की प्रभावी पैरवी से लेकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने में अहम भूमिका है।

मुख्यमंत्री शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित लोक अभियोजकों एवं विधि अधिकारियों के संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद और पीड़ित व्यक्ति न्याय की आस लेकर आते हैं। ऐसे में उनके साथ संवेदनशील और सकारात्मक व्यवहार किया जाना आवश्यक है। लोक अभियोजकों को कानून के प्रावधानों के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए।

रिटेनरशिप, एपीयरेंस, ड्राफ्टिंग और ओपिनियन फीस में वृद्धि

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले विधि अधिकारियों की रिटेनरशिप और एपीयरेंस फीस बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही ड्राफ्टिंग और ओपिनियन फीस में भी वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि विधि अधिकारियों की समस्याओं के समाधान और उनके साथ नियमित संवाद के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी जाएगी। राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों में नियुक्त विधि अधिकारियों के पारिश्रमिक में अब तक दो बार वृद्धि कर चुकी है। कार्यक्रम में लोक अभियोजकों और विधि अधिकारियों ने पारिश्रमिक एवं फीस में बढ़ोतरी के फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव का लाभ लें लोक अभियोजक

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक अभियोजकों को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव का लाभ दिलाने के लिए नियमित सेमिनार और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। इससे न्यायालयीन प्रकरणों में सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का सामूहिक चर्चा के माध्यम से समाधान किया जा सकेगा। उन्होंने विभागों और जिला स्तर पर उच्चाधिकारियों के साथ समन्वय एवं संवाद की व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया।

जनहित के लंबित मामलों की बने सूची, नियमित हो मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालयों में प्रकरणों के वर्षों तक लंबित रहने से परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है और उनके क्रियान्वयन में भी विलंब होता है। ऐसे में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की पहचान कर उनके शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने प्रत्येक जिले और विभाग में ऐसे प्रकरणों की सूची तैयार करने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत पैरवी के जरिए जनहित के मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज्य सरकार ने 80 न्यायालयों का किया सृजन

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 80 नए न्यायालयों का सृजन किया है। इनमें 14 जिला एवं सेशन न्यायालय, 2 अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय, 8 सीजेएम, 8 एसीजेएम सहित एसीबी, पॉक्सो, एनआई, एनडीपीएस और वाणिज्यिक न्यायालय शामिल हैं।

राजस्थान उच्च न्यायालय में 10 अतिरिक्त महाधिवक्ता, 9 एजीसी और 2 विशिष्ट लोक अभियोजक के नए पद भी सृजित किए गए हैं। नवीन अतिरिक्त महाधिवक्ताओं के कार्यालयों के लिए मंत्रालयिक संवर्ग के 40 नए पद बनाए गए हैं।

इसके अलावा लोक अभियोजक, विशिष्ट लोक अभियोजक और अपर लोक अभियोजक के 76 पद, अधीनस्थ कार्यालयों में मंत्रालयिक संवर्ग के 109 पद तथा होमगार्ड के 77 नए पद सृजित किए गए हैं। लोक अभियोजकों के लिए कार्यालय, कम्प्यूटर और अधीनस्थ स्टाफ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

1.20 लाख विधिक साक्षरता शिविर, 76.67 लाख लोग लाभान्वित

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर जरूरतमंद व्यक्ति तक न्याय सुलभ रूप से पहुंचाना है। इसी दिशा में 27 हजार 251 व्यक्तियों को कैदी एवं बाल सुरक्षा योजना के तहत विधिक सहायता दी गई है।

राजस्थान पीड़ित प्रतिकर स्कीम के अंतर्गत 3 हजार 905 पीड़ितों को 84 करोड़ 53 लाख रुपए का प्रतिकर दिया गया है। वहीं, 1 लाख 20 हजार विधिक साक्षरता शिविरों के माध्यम से 76 लाख 67 हजार व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया है।

जेलों में बंद किशोरों की पहचान कर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए युवाओं का पुनर्वास अभियान संचालित किया जा रहा है। साथ ही उड़ान योजना छात्रवृत्ति भी प्रारंभ की गई है।

3.80 लाख पदों पर भर्तियों का मार्ग प्रशस्त

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को सरकारी क्षेत्र में चार लाख नौकरियां देने के वादे को पूरा करने की दिशा में अब तक 1 लाख 78 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। 1 लाख 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है, जबकि 70 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पानी, बिजली, उद्योग, रोजगार, सड़क, कृषि, सहकारिता और डेयरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगातार फैसले ले रही है। रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता और देवास परियोजना जैसे कार्यों को गति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में हुए 35 लाख करोड़ रुपए के एमओयू में से करीब 9 लाख करोड़ रुपए के एमओयू धरातल पर उतर चुके हैं।

लोक अभियोजक पूरी निष्ठा से सरकार की मंशा को करें साकार: जोगाराम पटेल

विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि और विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजकों को सरकार की मंशा को साकार करने की दिशा में पूरी निष्ठा से कार्य करना चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि डबल इंजन की सरकार लोकतंत्र को मजबूत करने तथा आमजन को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के लिए निरंतर काम कर रही है। इस अवसर पर महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, प्रमुख शासन सचिव विधि राघवेंद्र काछवाल सहित अतिरिक्त महाधिवक्ता, लोक अभियोजक और बड़ी संख्या में विधि अधिकारी उपस्थित रहे।

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