Saturday, 08 August 2026

राजस्थान के 9 कानून बने ‘कागजी’, विधानसभा राज्यपाल की मंजूरी के बाद भी लागू होने का इंतजार


राजस्थान के 9 कानून बने ‘कागजी’, विधानसभा राज्यपाल की मंजूरी के बाद भी लागू होने का इंतजार

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छह कानूनों में सिर्फ प्रभावी तारीख की अधिसूचना बाकी, दो नए विश्वविद्यालय और RIMS भी स्थापना की प्रक्रिया में अटके

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नए सत्र की तैयारियों के बीच राज्य के कई ऐसे कानून चर्चा में हैं, जिन्हें विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद भी अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे कुल 9 कानून हैं, जिनमें से 5 मौजूदा सरकार और 3 पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल से जुड़े हैं, जबकि एक कानून वर्ष 2015 से लंबित है।

इनमें से छह कानून ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें लागू करने के लिए संबंधित विभागों को केवल प्रभावी तारीख अधिसूचित करनी है। इसके बावजूद अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

2015 से लंबित मुकदमेबाजी निवारण कानून

राजस्थान तंग करने वाली मुकदमेबाजी (निवारण) अधिनियम, 2015 उन मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिनमें बार-बार या बेवजह मुकदमे दायर कर अदालतों का समय खराब किया जाता है। कानून बनने के बावजूद इसके प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति अब तक लंबित बताई जा रही है।

स्वास्थ्य का अधिकार कानून भी पूरी तरह प्रभावी नहीं

राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022 प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा कानूनी अधिकार देने के उद्देश्य से लाया गया था। इसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा कानून के रूप में पेश किया गया था, लेकिन इसके पूर्ण प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।

न्यूनतम आय गारंटी कानून लागू होने का इंतजार

राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम, 2023 मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के माध्यम से न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया था। कानून पारित होने के बाद भी इसे प्रभावी करने की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है।

गिग वर्कर्स कल्याण कानून भी अटका

राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले गिग वर्कर्स को पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए लाया गया था। यह कानून भी अब तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाया है।

कोचिंग सेंटर नियमन कानून का भी इंतजार

राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) अधिनियम, 2025 कोचिंग संस्थानों के पंजीयन, नियमन, विद्यार्थियों की सुविधाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कॅरियर मार्गदर्शन जैसे प्रावधानों के लिए बनाया गया था। कानून बनने के बावजूद इसके लागू होने की प्रभावी तारीख और संबंधित क्रियान्वयन व्यवस्था का इंतजार है।

भू-जल संरक्षण कानून भी लागू नहीं

राजस्थान भू-जल (संरक्षण और प्रबंध) प्राधिकरण अधिनियम, 2024 गिरते भू-जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए लाया गया था। इसमें घरेलू और कृषि उपयोग को छोड़कर अन्य उद्देश्यों के लिए भू-जल दोहन पर प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य करने का प्रावधान है, लेकिन यह व्यवस्था भी अभी प्रभावी नहीं हो सकी है।

RIMS जयपुर की स्थापना भी लंबित

एम्स की तर्ज पर जयपुर में राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) स्थापित करने के लिए कानून बनाया जा चुका है, लेकिन संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।

महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय को कुलगुरु का इंतजार

महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय, जयपुर की स्थापना खेल गतिविधियों और खेल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जानी है। कानून बनने के बावजूद अब तक न कुलगुरु की नियुक्ति हुई है और न ही विश्वविद्यालय के स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है।

अजमेर में आयुर्वेद-योग विश्वविद्यालय भी अटका

राजस्थान आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर की स्थापना के लिए भी कानून बनाया जा चुका है और स्थान चिन्हित होने की जानकारी है। इसके बावजूद कुलगुरु की नियुक्ति और विश्वविद्यालय की अन्य प्रारंभिक गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं।

नए विधानसभा सत्र में उठ सकता है मुद्दा

राजस्थान विधानसभा का नया सत्र शुरू होने से पहले इन लंबित कानूनों की स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार की ओर से नए विधेयक लाए जाने की संभावना के बीच सवाल यह भी है कि पहले से पारित कानूनों को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया कब पूरी होगी। इन कानूनों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की अधिसूचना, नियम निर्माण और प्रशासनिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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