



नगरफोर्ट थाने में सरेंडर के बाद टोंक की SC/ST कोर्ट में पेशी, जमानत रद्द होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा
टोंक। समरावता एसडीएम थप्पड़ कांड में नरेश मीणा को टोंक की SC/ST कोर्ट ने फिर जेल भेज दिया है। उन्होंने गुरुवार दोपहर नगरफोर्ट थाने में आत्मसमर्पण किया था। अब उनकी जमानत याचिका पर 10 अगस्त को सुनवाई होगी।
नरेश मीणा को इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी, लेकिन बाद में कथित रूप से जमानत की शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आया। इसके बाद SC/ST कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को उनकी जमानत रद्द कर दी थी।
नरेश मीणा गुरुवार सुबह समर्थकों के साथ जयपुर से नगरफोर्ट के लिए रवाना हुए। करीब 10:30 बजे वे टोंक जिले के नगरफोर्ट पहुंचे और थाने में आत्मसमर्पण किया।
सरेंडर के बाद उन्हें करीब 20 मिनट तक थाने में रखा गया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच टोंक स्थित SC/ST कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।
नरेश मीणा की ओर से अब दोबारा जमानत की मांग की गई है। उनकी जमानत याचिका पर 10 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है।
अदालत उस दिन मामले की परिस्थितियों, पूर्व जमानत की शर्तों और अभियोजन तथा बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करेगी।
सरेंडर से पहले नरेश मीणा ने अपने खिलाफ लगाए गए हत्या के प्रयास के आरोप को गलत बताया।
उन्होंने कहा कि थप्पड़ मारने की घटना में सामान्य धाराएं लगनी चाहिए थीं और घटना का वीडियो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह संबंधित एसडीएम को पहले से नहीं जानते थे।
नरेश मीणा के अनुसार हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ धारा 307 के तहत चल रहे ट्रायल पर रोक लगा रखी है। यह उनका पक्ष है; संबंधित आरोपों की अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
नगरफोर्ट पहुंचने से पहले जयपुर-कोटा हाईवे पर कई स्थानों पर नरेश मीणा के समर्थक जमा हुए। समर्थकों ने नारेबाजी की और फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।
समर्थकों की भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए।
एडीएम विनोद कुमार मीणा के अनुसार नरेश मीणा के सरेंडर को देखते हुए टोंक, देवली और नगरफोर्ट में मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोंक, देवली और उनियारा क्षेत्र में धारा 163 के तहत भीड़ पर पाबंदी भी लागू की गई।
नरेश मीणा का जेल भेजा जाना या जमानत रद्द होना दोषसिद्धि नहीं है। उनके खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निर्णय साक्ष्यों, गवाहों और न्यायिक सुनवाई के बाद ही होगा।