



नई दिल्ली। संसद भवन के जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संसदीय दल की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित एनडीए के वरिष्ठ नेताओं और दोनों सदनों के सांसदों ने भाग लिया। मानसून सत्र के बीच हुई बैठक में सरकार की संसदीय रणनीति, परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित कानून पर चर्चा की गई।
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विशेषता नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की पहली भागीदारी रही। एनसीपीआई को पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में आमंत्रित किया गया था। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई के साथ आए सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने की घोषणा की है।
बैठक में एनसीपीआई नेता सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, शर्मिला सरकार और मिताली बाग सहित पार्टी के अन्य सांसद शामिल हुए। सुदीप बंदोपाध्याय को लोकसभा में एनसीपीआई के नेता, काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक और शताब्दी रॉय को उपनेता के रूप में आगे किए जाने की जानकारी सामने आई है।
एनसीपीआई की बैठक में उपस्थिति को संसद के भीतर बदले राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दल तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के कारण लोकसभा में एक नए संसदीय समूह के रूप में उभरा है। एनडीए की बैठक में उसकी भागीदारी से सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या और पश्चिम बंगाल से जुड़ी राजनीतिक रणनीति को मजबूती मिलने की संभावना है। यह उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर राजनीतिक आकलन है।
लोकसभा में मंगलवार को ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर विचार और चर्चा निर्धारित है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक पर बहस के लिए छह घंटे से अधिक का समय उपलब्ध कराने की बात कही है। आवश्यकता पड़ने पर चर्चा की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
सरकार और विपक्ष के बीच सोमवार को बनी सहमति के बाद विधेयक पर चर्चा का रास्ता साफ हुआ। इससे पहले विपक्षी सदस्यों के हंगामे और छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई थी।
यह विधेयक केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में प्रस्तुत किया था। इसके माध्यम से वर्ष 2024 के सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन कर पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध दंड और जुर्माने को अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव है।
विधेयक में पेपर लीक से जुड़े मामलों की समयबद्ध जांच, विशेष कार्यबल के गठन और त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था प्रस्तावित है। इन अदालतों में नियमित रूप से सुनवाई कर मामलों का शीघ्र निस्तारण करने पर जोर दिया गया है।
एनडीए की बैठक में सांसदों से विधेयक पर सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा विद्यार्थियों के हितों से जुड़े प्रावधानों को प्रमुखता से सामने रखने पर चर्चा हुई। सरकार विधेयक को परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि विपक्ष की ओर से जांच व्यवस्था, जवाबदेही और परीक्षा सुधारों की प्रभावशीलता से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की संभावना है।