Tuesday, 28 July 2026

संसद में 28 जुलाई को एंटी-पेपर लीक बिल पर 6 घंटे चर्चा, दोषियों को 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव


संसद में 28 जुलाई को एंटी-पेपर लीक बिल पर 6 घंटे चर्चा, दोषियों को 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार, 28 जुलाई को ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा होगी। सरकार और विपक्ष के बीच सोमवार को बनी सहमति के बाद विधेयक को आज विचार और पारित करने के लिए लोकसभा की कार्यसूची में शामिल किया गया है। चर्चा दोपहर करीब 12 बजे शुरू होने की संभावना है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की सहमति के आधार पर चर्चा का समय आगे भी बढ़ाया जा सकता है। विधेयक को लेकर सांसदों की ओर से 91 संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं।

सोमवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक लोकसभा में पेश किया था। बार-बार कार्यवाही स्थगित होने के कारण उसी दिन इस पर चर्चा नहीं हो सकी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सरकार और विपक्ष के नेताओं से बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने की पहल की। शाम तक सभी पक्ष मंगलवार को विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए सहमत हो गए।

यह विधेयक वर्ष 2024 में लागू किए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ में संशोधन करेगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, परीक्षा प्रक्रिया में सेंध और अन्य अनुचित साधनों से जुड़े मामलों में जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया को अधिक कठोर और समयबद्ध बनाना है।

दोषियों के लिए सजा और जुर्माना बढ़ेगा

मौजूदा कानून में अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्ति के लिए तीन से पांच वर्ष तक की कैद और अधिकतम ₹10 लाख जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन विधेयक में इसे बढ़ाकर पांच से दस वर्ष तक की कैद और अधिकतम ₹50 लाख जुर्माना करने का प्रस्ताव है।

परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता संस्था के अनुचित साधनों में शामिल पाए जाने पर मौजूदा ₹1 करोड़ तक के जुर्माने को बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक किया जाएगा। संस्था के प्रभारी व्यक्तियों के लिए कम से कम पांच वर्ष की कैद और ₹5 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है।

संगठित पेपर लीक पर न्यूनतम सात साल की जेल

संगठित अपराध के रूप में किए गए पेपर लीक या परीक्षा धोखाधड़ी के मामले में कम से कम सात वर्ष की कैद और न्यूनतम ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव है। वर्तमान कानून में ऐसे अपराध के लिए पांच से दस वर्ष तक की कैद और कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान है।

अनुचित साधनों में शामिल सेवा प्रदाता संस्था को सार्वजनिक परीक्षा के संचालन से प्रतिबंधित करने की अवधि भी चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है।

दो महीने में जांच, तीन महीने में ट्रायल

विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार को गंभीर मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल यानी स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी दिया जाएगा।

प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को सत्र न्यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करना होगा। इन अदालतों में मामले की रोजाना सुनवाई की जाएगी और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का ट्रायल पूरा करना होगा। पहले से लंबित मामलों को भी इन विशेष अदालतों में स्थानांतरित किया जाएगा।

हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ सुनेगी अपील

विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले, सजा या आदेश के विरुद्ध अपील संबंधित हाईकोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ के समक्ष की जा सकेगी। अपील आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी और उसका निस्तारण जहां तक संभव हो, तीन महीने में किया जाएगा।

यह कानून संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा।

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही, हाल में सामने आए पेपर लीक मामलों, जांच एजेंसियों की भूमिका और छात्रों को हुए नुकसान जैसे विषय उठा सकता है। वहीं सरकार विधेयक को परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने और संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कठोर कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत करेगी।

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