



अजमेर। ऐतिहासिक आना सागर झील में जलस्तर अचानक घटने के बाद हजारों मछलियों की मौत का मामला अब राजनीतिक रूप लेने लगा है। गुरुवार को शहर कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने आना सागर चौपाटी पर विरोध-प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
झील के किनारे मरी हुई मछलियों के सड़ने से फैली तेज बदबू के बीच प्रदर्शनकारी मास्क लगाकर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण मछलियों की बड़े पैमाने पर मौत हुई और पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मानसून की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने झील से बड़ी मात्रा में पानी निकाल दिया। इससे जलस्तर तेजी से कम हुआ और पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित हुई।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि इसी कारण हजारों मछलियां तड़प-तड़प कर मर गईं। उन्होंने कहा कि जलस्तर कम करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव और जलीय जीवों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त योजना बनाई जानी चाहिए थी।
आना सागर चौपाटी क्षेत्र में बदबू इतनी अधिक बताई गई कि प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मुंह पर मास्क लगाना पड़ा। नेताओं ने कहा कि मरी हुई मछलियों को समय पर हटाने और झील की सफाई नहीं होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और व्यापारियों को परेशानी हो रही है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मृत मछलियों को तत्काल हटाने, झील की सफाई कराने और पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच करवाने की मांग की।
आना सागर झील अजमेर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। मरी हुई मछलियों और दुर्गंध के कारण चौपाटी पर आने वाले पर्यटकों की संख्या कम होने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, दुर्गंध के कारण लोग झील किनारे अधिक समय नहीं रुक रहे हैं। इसका असर खाने-पीने की दुकानों, ठेलों और अन्य छोटे कारोबारों पर भी पड़ रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि झील शहर की पहचान और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय धरोहर है, इसलिए इसके रखरखाव में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि शीघ्र सफाई और सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, मछलियों की सामूहिक मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पानी में घुलित ऑक्सीजन, तापमान, प्रदूषण, अमोनिया और अन्य रासायनिक तत्वों की जांच जरूरी होती है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मछलियों की मौत के कारणों और जलस्तर कम करने संबंधी आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।