



जयपुर। राजस्थान में लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार और ओबीसी आयोग से स्पष्ट समयबद्ध कार्यक्रम मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को सोमवार तक चुनाव की प्रस्तावित तारीख बताने के निर्देश दिए।
अदालत ने ओबीसी आयोग से भी यह स्पष्ट करने को कहा कि वह अपनी रिपोर्ट कब तक प्रस्तुत करेगा। वहीं, राज्य सरकार को आरक्षण संबंधी लॉटरी निकालने की निश्चित तारीख बतानी होगी। हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने का आदेश दे चुका है।
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव अदालत के समक्ष उपस्थित रहे। पिछली सुनवाई में चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तलब किया था।
अदालत ने राज्य निर्वाचन आयुक्त से पूछा कि पूर्व में निर्धारित समय-सीमा के बावजूद चुनाव कार्यक्रम क्यों जारी नहीं किया गया। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की लगातार पालना नहीं होने से अवमानना की स्थिति बन रही है। चुनाव में देरी पर अदालत पहले भी सरकार और संबंधित आयोगों के कामकाज को लेकर कड़ी नाराजगी जता चुकी है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने अदालत को बताया कि आयोग की चुनाव संबंधी तैयारियां पूरी हैं। आयोग को राज्य सरकार की ओर से आरक्षण का वर्गीकरण और लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।
उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण की लॉटरी निकालकर आवश्यक विवरण आयोग को उपलब्ध करा दे तो दो दिन के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। आयोग ने चुनाव में देरी का प्रमुख कारण आरक्षण और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया लंबित होना बताया।
हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जब आयोग का गठन 9 मई 2025 को तीन महीने के लिए किया गया था तो निर्धारित अवधि में रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई।
खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि यदि आयोग निर्धारित कार्य नहीं कर सकता तो उसे स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अदालत ने आयोग को सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की निश्चित तारीख बताने के निर्देश दिए।
प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के लिए आवश्यक आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया हाल में भी जारी रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में आरक्षण का नया वर्गीकरण किया जाना है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सोमवार तक बताए कि आरक्षण निर्धारण के लिए लॉटरी कब निकाली जाएगी। सरकार द्वारा लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग वार्ड और पदवार आरक्षण के आधार पर चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकेगा।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब सामान्य या अनिश्चित जवाब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सरकार, निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग को अपने-अपने हिस्से की प्रक्रिया के लिए ठोस तारीख प्रस्तुत करनी होगी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रारंभ में पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग ने चुनाव टालने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
हाईकोर्ट ने 22 मई को अतिरिक्त समय देते हुए सरकार और निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक हर हाल में चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही ओबीसी आयोग को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया अब तक प्रारंभ नहीं होने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
अब सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की तारीख, ओबीसी आयोग को रिपोर्ट देने की समय-सीमा और राज्य सरकार को आरक्षण लॉटरी की तारीख बतानी होगी।
इन तीनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत कार्यक्रम के आधार पर हाईकोर्ट आगे का आदेश पारित करेगा। अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि चुनाव प्रक्रिया में और देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना अथवा अन्य सख्त आदेश पारित किए जा सकते हैं।