



दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेताओं की उच्चस्तरीय बैठकों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निवास पर संघ और भाजपा नेताओं के बीच करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद भाजपा संगठन में बड़े फेरबदल, राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम, केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव और कुछ राज्यों में राज्यपालों के परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में संघ के सहसरकार्यवाह अरुण कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, सहसंगठन महामंत्री शिवप्रकाश, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वरिष्ठ भाजपा नेता जेपी नड्डा सहित संगठन और सरकार से जुड़े प्रमुख चेहरे शामिल रहे। बैठक को भाजपा के आगामी संगठनात्मक रोडमैप और सरकार-संगठन के समन्वय की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
इस बैठक से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की अध्यक्षता में भी संघ और भाजपा संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों की अहम चर्चा हुई थी। इसमें सहसरकार्यवाह अरुण कुमार, आलोक कुमार, सीआर मुकुंद सहित भाजपा संगठन कार्य के लिए भेजे गए पूर्णकालिक प्रचारकों और भाजपा के संगठनात्मक पदाधिकारियों से जुड़े विषयों पर विमर्श होने की बात सामने आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में केंद्रीय संगठन की नई टीम का गठन अब अंतिम चरण में हो सकता है। इसी क्रम में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा, राज्यों में संगठनात्मक बदलाव और आगामी चुनावी राज्यों को लेकर नई जिम्मेदारियों के बंटवारे पर चर्चा संभव मानी जा रही है।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल के लिए कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि कुछ चेहरों को संगठन में सक्रिय भूमिका मिल सकती है। हालांकि इस संबंध में भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इसी तरह पांच से छह राज्यों में राज्यपालों के बदलाव की संभावना को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि संगठनात्मक संतुलन, राजनीतिक अनुभव और आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछ वरिष्ठ नेताओं को संवैधानिक पदों पर भेजा जा सकता है। हालांकि यह पूरी तरह अटकलों के स्तर पर है और आधिकारिक निर्णय सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
भाजपा-आरएसएस के बीच हुई इन बैठकों को आगामी राजनीतिक रणनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, राज्यों में नेतृत्व को सक्रिय करने और केंद्र सरकार की योजनाओं को राजनीतिक रूप से प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा के लिए आने वाला समय संगठनात्मक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कई राज्यों में चुनावी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और पार्टी अपने संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर हुई यह बैठक आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक फैसलों का संकेत मानी जा रही है।
हालांकि भाजपा या आरएसएस की ओर से बैठक के एजेंडे और निष्कर्षों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद बैठक में शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने दिल्ली के राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चाओं को हवा दे दी है। अब सबकी नजर भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम, संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल और राज्यपालों की नियुक्तियों से जुड़े आगामी फैसलों पर टिकी हुई है।