



राजस्थान सरकार ने बोर्ड, निगम, पंचायतीराज संस्थाओं, स्वायत्त निकायों और अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं से सीधी भर्ती के माध्यम से सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे कर्मचारियों को अब पे-प्रोटेक्शन (वेतन संरक्षण) का लाभ नहीं मिलेगा। इस संबंध में सभी विभागों को सर्कुलर जारी कर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को जारी प्रावधानों के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), स्वायत्त निकायों, स्थानीय निकायों, पंचायतीराज संस्थाओं, बोर्डों और निगमों में कार्यरत कर्मचारी राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी नहीं माने जाएंगे। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी सीधी भर्ती के माध्यम से सरकारी सेवा में चयनित होता है, तो उसका वेतन उसके पूर्व संस्थान में प्राप्त अंतिम वेतन के आधार पर निर्धारित नहीं किया जाएगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 और 26 के तहत मिलने वाला पे-प्रोटेक्शन का लाभ इन कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो पहले किसी बोर्ड, निगम या स्वायत्त संस्था में अपेक्षाकृत अधिक वेतन प्राप्त कर रहे थे और बाद में सरकारी सेवा में चयनित हुए हैं।
नई व्यवस्था के तहत ऐसे कर्मचारियों का वेतन संबंधित सरकारी पद के निर्धारित वेतनमान और नियमों के अनुसार तय किया जाएगा। इससे कई मामलों में कर्मचारियों का वेतन पूर्व संस्थान की तुलना में कम भी हो सकता है।
वित्त विभाग ने अपने सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया है कि स्पष्ट नियमों के बावजूद विभिन्न विभागों से अभी भी पे-प्रोटेक्शन से संबंधित संदर्भ और प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। कुछ मामलों में विभागों ने न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए पूर्व वेतन के आधार पर वेतन निर्धारण भी कर दिया है।
सर्कुलर में कहा गया है कि यदि किसी मामले में उच्च न्यायालय या अपीलीय न्यायाधिकरण का निर्णय आता है, तो उसे लागू करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा। ऐसे मामलों की पहले प्री-लिटिगेशन कमेटी द्वारा जांच की जाएगी। इसके बाद अपील दायर करने अथवा निर्णय लागू करने के संबंध में वित्त विभाग की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों, कार्यालयों और संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे न्यायालयी आदेशों के अनुपालन या उनके विरुद्ध अपील करने के मामलों में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करें। बिना सक्षम स्वीकृति के किसी भी कर्मचारी को पे-प्रोटेक्शन का लाभ नहीं दिया जाए।
गौरतलब है कि सामान्यतः सरकारी सेवा के भीतर एक पद से दूसरे पद पर नियुक्ति या चयन की कुछ परिस्थितियों में पे-प्रोटेक्शन का लाभ दिया जाता है, ताकि कर्मचारी को पहले से कम वेतन न मिले। लेकिन अब बोर्ड, निगम, पंचायतीराज संस्थाओं और अन्य स्वायत्त संस्थाओं से आने वाले कर्मचारियों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है।