



राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए राज्य सरकार के कार्यों और चुनावी वादों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि कोई उन पर उंगली उठाकर बताए, लेकिन उंगली तभी उठती है जब कोई काम किया गया हो या किसी मुद्दे पर जवाबदेही बनती हो।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि वे स्वयं मुख्यमंत्री से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हुए नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में नौ दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर घटना के बावजूद मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
नेता प्रतिपक्ष ने उदयपुर में आदिवासी समुदाय की जमीनों से जुड़े कथित मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीनों पर कब्जे के आरोप सामने आए, लेकिन सरकार ने इस संबंध में क्या कदम उठाए, इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की प्रमुख जल परियोजनाओं को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती योजनाओं जैसे पीकेसी, राम जल सेतु और ईआरसीपी (ERCP) के नाम बदलकर सरकार ने नए दावे किए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इन परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति क्या है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने का दावा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना बनाने की घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक केंद्र की ओर से वित्तीय सहायता नहीं मिली है। उनके अनुसार, ढाई वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी परियोजना को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया है।
टीकाराम जूली ने राज्य सरकार द्वारा किए गए 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि इनमें से कितने निवेश प्रस्ताव वास्तव में धरातल पर उतरे हैं और कितनी परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजस्थान की जनता, विशेषकर युवा वर्ग, सरकार से जवाब चाहता है। चुनाव के दौरान किए गए वादों, रोजगार, निवेश और विकास परियोजनाओं को लेकर जनता के सामने स्पष्ट स्थिति रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिणाम भी दिखाई देने चाहिए।