Wednesday, 03 June 2026

पंचायती राज और निकाय चुनावों की तैयारी तेज, निर्वाचन आयोग ने मांगा आरक्षण संबंधी डेटा,लिखा सरकार को पत्र


पंचायती राज और निकाय चुनावों की तैयारी तेज, निर्वाचन आयोग ने मांगा आरक्षण संबंधी डेटा,लिखा सरकार को पत्र

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राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए 31 जुलाई की समय सीमा निर्धारित किए जाने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर आरक्षण संबंधी आवश्यक आंकड़े जल्द उपलब्ध कराने को कहा है।

प्रदेश में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से पंचायती राज और स्थानीय निकायों के चुनाव लंबित हैं। इस बीच राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री जोगाराम पटेल, झाबर सिंह खर्रा और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि सरकार चुनाव कराने के लिए तैयार है और अब राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। मंत्रियों के इन बयानों के बाद आयोग ने संबंधित विभागों से आरक्षण डेटा की मांग कर चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

गौरतलब है कि चुनाव प्रक्रिया में देरी को लेकर पहले भी न्यायालय की सख्त टिप्पणी सामने आ चुकी है। 15 अप्रैल को चुनाव संबंधी एक मामले में मतदाता सूची तैयार करने में देरी के कारण राज्य निर्वाचन आयोग को अदालत में अवमानना की स्थिति का सामना करना पड़ा था। उस दौरान आयोग को न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी भी मांगनी पड़ी थी।

सूत्रों के अनुसार इस बार निर्वाचन आयोग किसी भी प्रकार की अवमानना की स्थिति से बचना चाहता है और निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज और आंकड़े समय पर प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।

हाईकोर्ट ने पूर्व में 15 अप्रैल को दिए गए आदेश में चुनाव कराने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। हालांकि उस समय भी पंचायती राज विभाग आरक्षण से संबंधित आवश्यक आंकड़े आयोग को उपलब्ध नहीं करा सका था। विभाग की ओर से ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला दिया गया था। बताया जाता है कि निर्वाचन आयोग द्वारा कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद आवश्यक डेटा समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया।

अब जबकि हाईकोर्ट ने 31 जुलाई की अंतिम समय सीमा निर्धारित कर रखी है, ऐसे में सभी संबंधित विभागों पर समयबद्ध कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में तेजी देखने को मिल सकती है।

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