Tuesday, 26 May 2026

राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: पंचायत और निकाय चुनाव टालने पर अवमानना याचिकाएं खारिज, 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश बरकरार


राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: पंचायत और निकाय चुनाव टालने पर अवमानना याचिकाएं खारिज, 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश बरकरार

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जयपुर | राजस्थान की राजनीति में पिछले एक वर्ष से चल रहे पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के सबसे बड़े सियासी और कानूनी विवाद पर सोमवार 26 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई और कानूनी समीक्षा के बाद कहा कि अवमानना का मामला नहीं बनता, इसलिए याचिकाओं को सारहीन मानते हुए निरस्त किया जाता है। इस फैसले से जहां राज्य सरकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर चुनाव कराने की सख्त समयसीमा ने प्रशासन और निर्वाचन आयोग को पूरी तरह चुनावी मोड में ला दिया है।

15 अप्रैल तक चुनाव कराने का था पुराना आदेश

दरअसल, नवंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेशभर में दायर करीब 439 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समय पर कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने उस समय आदेश दिया था कि 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जाए तथा 15 अप्रैल 2026 से पहले चुनाव संपन्न कराए जाएं। लेकिन निर्धारित समय सीमा गुजर जाने के बावजूद चुनाव नहीं हो सके। इसके बाद विपक्षी दलों और याचिकाकर्ताओं ने इसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना याचिकाएं दायर की थीं।

कांग्रेस नेताओं ने दायर की थी अवमानना याचिका

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा तथा गिर्राज सिंह देवंदा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है और अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पिछले महीने राज्य निर्वाचन आयोग को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद पूरे मामले पर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चा चल रही थी।

सरकार को राहत, लेकिन बढ़ा चुनावी दबाव

सोमवार को आए फैसले में हाईकोर्ट ने सरकार को अवमानना कार्रवाई से राहत तो दे दी, लेकिन 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देशों को प्रभावी बनाए रखा। माना जा रहा है कि अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को पंचायत, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के चुनाव की तैयारियों को तेजी से पूरा करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला प्रदेश की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि लंबे समय से चुनाव टलने को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा है। अब अदालत की तय समयसीमा के बाद चुनावी गतिविधियां और राजनीतिक सरगर्मियां तेजी पकड़ सकती हैं।

पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधि

प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब गांवों से लेकर शहरों तक राजनीतिक समीकरण और संगठनात्मक तैयारियां तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि लंबे समय बाद स्थानीय निकायों में सत्ता संतुलन का बड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।

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