Monday, 11 May 2026

पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से कहा- लगातार चुनाव टालना ठीक नहीं, फैसला रखा सुरक्षित


पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से कहा- लगातार चुनाव टालना ठीक नहीं, फैसला रखा सुरक्षित

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार का यह रवैया उचित नहीं है और कोर्ट पहले ही पर्याप्त समय दे चुका है, लेकिन चुनाव लगातार टाले जा रहे हैं।

प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव स्थगित किए जाने को लेकर राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि निकाय चुनावों में वार्डों के आंतरिक परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसलों के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इस पर बैंच ने सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश निकाय चुनावों को लेकर था, फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए।

महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने जवाब में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण पंचायत चुनाव नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि सरकार ने 9 मई 2025 को ही ओबीसी आयोग का गठन कर दिया था, लेकिन आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बार-बार समय मांगा, जिसके चलते उसका कार्यकाल बढ़ाना पड़ा। इस पर बैंच ने टिप्पणी की कि आयोग क्या कर रहा है, यह भी अदालत के सामने स्पष्ट नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत और सरकार के बीच कई तीखी टिप्पणियां भी हुईं। सरकार की ओर से जून माह में भीषण गर्मी और हीटवेव का हवाला देकर चुनाव कराने में कठिनाई की बात कही गई। इस पर बैंच ने कहा कि राजस्थान के लोग गर्मी से निपटना जानते हैं और यह चुनाव टालने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता। जब सरकार की ओर से कहा गया कि उम्मीदवारों को प्रचार में परेशानी होगी, तब कोर्ट ने कहा कि उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। वहीं जुलाई में बारिश के मौसम का हवाला दिए जाने पर बैंच ने टिप्पणी की, “राजस्थान में बरसात?” 

याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट पुनीत सिंघवी ने कहा कि सरकार की चुनाव कराने की मंशा ही नहीं है और प्रदेश में संवैधानिक संकट जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि पंचायतों में प्रशासक और निकायों में अधिकारी काम संभाल रहे हैं। 

वहीं एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि प्रदेश की हजारों पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन सरकार पिछले डेढ़ वर्ष से चुनाव टाल रही है।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान समयसीमा के भीतर चुनाव कराने की बात कही थी।

अब राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने अदालत से और समय मांगा है। वहीं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा ने चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी।

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