



कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार प्रवासी राजस्थानियों की मजबूत राजनीतिक भूमिका देखने को मिली। भाजपा ने रणनीतिक रूप से ऐसे 9 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिनकी जड़ें राजस्थान से जुड़ी रही हैं। इनमें से 5 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर विधानसभा तक पहुंच बनाई, जिससे पार्टी की रणनीति को बड़ी सफलता मिली है। ये सभी नेता मूलत: राजस्थान के विभिन्न जिलों से वर्षों पहले रोजगार और व्यापार के सिलसिले में बंगाल गए थे और वहां सक्रिय राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित की।
जीत दर्ज करने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में विजय ओझा (जोड़ासांको), भरत कुमार झंवर (बेलडांगा), अजय कुमार पोद्दार (कुल्टी), राजेश कुमार (जगद्दल) और अशोक कीर्तनिया (बनगांव उत्तर) शामिल हैं। ये सभी उम्मीदवार अच्छे अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। खास बात यह है कि इन नेताओं का अपने मूल प्रदेश राजस्थान से आज भी गहरा जुड़ाव बना हुआ है, जिससे दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक संपर्क और मजबूत हुआ है।
भवानीपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा की रणनीति में राजस्थान टीम की अहम भूमिका रही। यह सीट राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट मानी जा रही थी, जहां भाजपा ने टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी को शिकस्त दी। इस जीत के पीछे राजस्थान के नेताओं की माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति को बड़ा कारण माना जा रहा है। वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में 9 सदस्यीय टीम बनाई गई थी, जिसने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करते हुए घर-घर संपर्क अभियान चलाया।
इस रणनीति के तहत विशेष रूप से भाजपा के घोषणा पत्र में बेरोजगारों और महिलाओं के लिए की गई घोषणाओं को व्यापक स्तर पर पहुंचाया गया, जिससे युवा और महिला मतदाताओं का समर्थन मिला। यह समर्थन जीत का निर्णायक कारक साबित हुआ। भवानीपुर से जीत दर्ज करने वाले भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी राजस्थान के नेताओं की सराहना करते हुए कहा कि राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में टीम ने बेहद प्रभावी कार्य किया। उन्होंने इन नेताओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए आभार व्यक्त किया।