



जयपुर। देश के ग्रामीण युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विद्यसी एजुकेशन ने नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSDC) और नेशनल एंट्रेप्रेन्योर्स एम्पावरमेंट ड्राइव (NEED) के साथ मिलकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत देशभर की लगभग 2 लाख पंचायतों में ‘करियर ग्रोथ ऑफिसर’ तैनात किए जाएंगे। यह समझौता बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुआ, जिसमें केंद्रीय और राज्य स्तर के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाशाली युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करना है, ताकि वे उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें। विद्यसी एजुकेशन के संस्थापक करुण कंदोई ने कहा कि गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में युवा अपने करियर को लेकर असमंजस में रहते हैं। करियर ग्रोथ ऑफिसर इस कमी को दूर करेंगे और युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम करेंगे।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में पेपर लीक जैसी घटनाओं से युवाओं के साथ अन्याय हुआ, लेकिन वर्तमान सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए 351 परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है, ताकि वे नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का सशक्त जरिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा को बहुभाषी और अंतरराष्ट्रीय बनाने पर विशेष बल दिया गया है। वहीं, जयंत चौधरी ने कहा कि इस तरह के समझौते भारतीय युवाओं को वैश्विक मंच प्रदान करेंगे और उनके कौशल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएंगे।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने इसे युवाओं के लिए अवसरों का सशक्त माध्यम बताया, जबकि कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता राज्य मंत्री के.के. विश्नोई ने कहा कि यह पहल युवाओं की प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल राज्य में कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। राजस्थान जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में विदेशी भाषा ज्ञान युवाओं के लिए अतिरिक्त लाभकारी साबित होगा और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।