



जयपुर। पचपदरा स्थित रिफाइनरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित लोकार्पण से ठीक पहले आग लगने की घटना पर सियासी घमासान तेज हो गया है। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए इसे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह हादसा सरकार की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी पूरे राजस्थान के मान-सम्मान और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है और इसके लोकार्पण का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। ऐसे में उद्घाटन से एक दिन पहले इस तरह की घटना होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे पूरे प्रदेश में निराशा का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले हादसों से कोई सबक नहीं लिया और हर बार जिम्मेदारी तय करने से बचा जाता रहा है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किसकी चूक से यह गंभीर घटना हुई। उन्होंने कहा कि इतने बड़े और हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम से ठीक पहले रिफाइनरी में आग लगना सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जूली ने यह भी कहा कि देश के इतिहास में शायद ही ऐसा कोई उदाहरण रहा हो, जब किसी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से ठीक पहले इस तरह का अग्निकांड हुआ हो।
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और प्रशासनिक अमला केवल आयोजन की भव्यता और इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त रहा, जबकि सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह हादसा उद्घाटन के दिन होता, तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि “दूध का दूध और पानी का पानी” होना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों से भी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने राज्य सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट से आगे बढ़कर गवर्नेंस की मूल जिम्मेदारियों पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस तरह की लापरवाही को राजस्थान की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।