



अजमेर। अजमेर पुलिस ने एक संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है, जो यूनानी थेरेपी के नाम पर बुजुर्गों को निशाना बनाकर लाखों रुपए की ठगी कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने एक फर्जी डॉक्टर सहित तीन आरोपियों को मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह विशेष रूप से उन बुजुर्गों को अपना शिकार बनाता था, जो जोड़ों के दर्द या नस संबंधी बीमारियों से पीड़ित होते थे और इलाज की तलाश में रहते थे।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) अग्रवाला के अनुसार, इस गिरोह को पकड़ने के लिए पुलिस ने तकनीकी संसाधनों का व्यापक उपयोग किया। अभय कमांड सेंटर और शहर में लगे 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया गया। जांच में लाल रंग की मारुति स्विफ्ट कार (RJ 28 CB 2022) की पहचान की गई, जिसके जरिए आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
इस गिरोह की ठगी का शिकार ब्रह्मपुरी निवासी 62 वर्षीय हरिराम किशनचंद बने, जिनसे घुटनों के दर्द के इलाज के नाम पर कुल ₹4,39,000 की ठगी की गई। आरोपियों ने फर्जी डॉक्टर “समीर जरीवाला” बनकर 73 बार मवाद निकालने का नाटक किया और हर बार ₹6000 वसूले। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹33,800 नकद, इलाज में प्रयुक्त उपकरण, दवाइयां, 12 मोबाइल फोन और 9 सिम कार्ड बरामद किए हैं।
जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। इसके सदस्य शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में रेडियम टेप लगाने के बहाने घूमते थे और संभावित शिकार की पहचान करते थे। इसके बाद एक सदस्य छद्म नाम से संपर्क कर यह भरोसा दिलाता था कि उसके परिचित का इलाज इसी डॉक्टर से हुआ और वह पूरी तरह ठीक हो गया। इसके बाद फर्जी डॉक्टर पीड़ित के घर जाकर सिंघी या सुई के जरिए मवाद निकालने का नाटक करता और नकद रकम वसूलता था।
गिरफ्तार आरोपियों में दीन मोहम्मद (38), मोहम्मद कादिर (28) और मोहम्मद आसिफ (35) शामिल हैं। इस कार्रवाई का नेतृत्व कोतवाली थाना अधिकारी अनिल देव ने किया, जिसमें कांस्टेबल गोरधन और अभय कमांड सेंटर के कांस्टेबल रामनिवास की अहम भूमिका रही। पुलिस अब आरोपियों से अन्य संभावित मामलों को लेकर गहन पूछताछ कर रही है और इस गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।