



जयपुर। राजस्थान की राजनीति में रिफाइनरी परियोजना को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा नेताओं के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जिन्हें रिफाइनरी की मूलभूत जानकारी तक नहीं है, उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स क्या होता है, इसके फायदे क्या हैं, यह समझे बिना केवल भाषण दिए जा रहे हैं और अनावश्यक रूप से उन पर निशाना साधा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि रिफाइनरी परियोजना पर टिप्पणी करने का वास्तविक अधिकार केवल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को है, क्योंकि वही इस पूरे प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति और समझौते की शर्तों को भली-भांति जानती हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह की कमी या त्रुटि रही होगी तो उसकी सही जानकारी केवल राजे ही दे सकती हैं। उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया कि चार वर्षों तक परियोजना को जानबूझकर रोके रखा गया और चुनावी दबाव के चलते अब प्रधानमंत्री को बुलाकर उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में इस परियोजना की शुरुआत कांग्रेस नेतृत्व में हुई थी, जब सोनिया गांधीऔर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने शिलान्यास किया था। उन्होंने परियोजना की लागत बढ़ने पर भी चिंता जताते हुए कहा कि 37 हजार करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट अब बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर कटाक्ष करते हुए गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को किसानों के जीवन की वास्तविक कठिनाइयों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान महीनों तक खून-पसीना बहाकर खेती करता है और प्राकृतिक आपदाओं के चलते उसकी फसल नष्ट हो जाती है, ऐसे में किसानों को लेकर हल्की टिप्पणी करना उचित नहीं है। गहलोत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को अपने अनुभव का सही उपयोग करना चाहिए और संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित बयान देना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में रिफाइनरी परियोजना एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गई है, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।