



जयपुर। जल जीवन मिशन से जुड़े ₹960 करोड़ के टेंडर घोटाले में गिरफ्तार रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल से एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की विशेष जांच टीम ने शनिवार को 12 घंटे से अधिक लंबी पूछताछ की। सुबह 9 बजे शुरू हुई यह पूछताछ देर रात तक चली, जिसमें 100 से ज्यादा सवाल पूछे गए। जांच के दौरान एसीबी ने तीन बार महेश जोशी से संबंधों को लेकर सवाल किया, लेकिन अग्रवाल ने हर बार चुप्पी साध ली।
पूछताछ के दौरान एसीबी ने श्रीगणपति ट्यूबवैल और श्रीश्याम ट्यूबवैल कंपनियों द्वारा इरकॉन का कथित फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर टेंडर हासिल करने के मामले पर सवाल किए। इस पर अग्रवाल ने जवाब दिया कि उन्होंने इस मामले की जांच विशाल सक्सेना से करवाई थी। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में अपनी किसी भी भूमिका से उन्होंने इनकार कर दिया। एसीबी अब उनके जवाबों के आधार पर नए सवाल तैयार कर रही है और जांच को आगे बढ़ा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार इस घोटाले कई इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका सामने आई है, जिसके चलते जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। एसीबी के पास दोनों कंपनियों के मालिकों से मुलाकात से जुड़े साक्ष्य भी मौजूद हैं। मामले की निगरानी के लिए डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह और ओम प्रकाश मीणा के नेतृत्व में टीम गठित की गई है, जिसमें तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी शामिल हैं। अग्रवाल को 13 अप्रैल तक रिमांड पर रखा गया है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि यदि समय रहते मामले का खुलासा नहीं होता, तो घोटाले की राशि ₹20 हजार करोड़ तक पहुंच सकती थी। इससे पहले एसीबी इस मामले में कई बड़े अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें मुख्य अभियंता और अन्य तकनीकी अधिकारी शामिल हैं।
रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को व्यक्तिगत राहत नहीं मिली। उन्होंने अपनी सास के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी थी, लेकिन न्यायालय ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक वह रिमांड पर हैं, इस स्तर पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।