Friday, 10 April 2026

जयपुर में भंडारी हॉस्पिटल पर ड्रग कंट्रोल का छापा, बिना अप्रूवल इंजेक्शन बिक्री का मामला


जयपुर में भंडारी हॉस्पिटल पर ड्रग कंट्रोल का छापा, बिना अप्रूवल इंजेक्शन बिक्री का मामला

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में ड्रग कंट्रोल विभाग और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की संयुक्त टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारकर बड़ी कार्रवाई की है। टीम को शिकायत मिली थी कि बिना वैध अनुमति के ‘ट्राइमेक्स’ नाम से इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। गुरुवार शाम की गई इस कार्रवाई में टीम ने अस्पताल से महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

ड्रग कंट्रोलर राजस्थान अजय फाटक के अनुसार, सेंट्रल टीम को सूचना मिली थी कि गुजरात में यौन रोगों के इलाज के नाम पर ‘ट्राइमेक्स’ इंजेक्शन ऑनलाइन बेचा जा रहा है, जबकि इस नाम से कोई दवा ड्रग विभाग में रजिस्टर्ड नहीं है। जांच में सामने आया कि यह इंजेक्शन ‘पौपावेरिन’, ‘एल्प्रोस्टैडिल’ और ‘क्लोरप्रोमाजिन’ जैसी दवाओं की मिश्रित डोज से तैयार किया गया था, जिसे ब्रांड बनाकर बेचना कानूनन गलत है।

बिना रजिस्ट्रेशन इंजेक्शन बेचने का आरोप

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन दवाओं का उपयोग डॉक्टर इलाज के दौरान अलग-अलग कर सकते हैं, लेकिन इन्हें एक ब्रांड के रूप में बाजार में बेचना अवैध है। इसी आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है और संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।

अस्पताल ने कर्मचारी पर डाला आरोप, FIR दर्ज

मामले में अस्पताल प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि यह पूरा घोटाला उनके कर्मचारी मनीष कुमार सोनी द्वारा किया गया। आरोप है कि उसने “ओमेन फार्मेसी” के नाम से फर्जीवाड़ा करते हुए डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर मरीजों को दवाइयां भेजीं और पैसे अपने निजी खाते में जमा कराए। अस्पताल को जानकारी मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ साइबर थाने में FIR दर्ज कराई गई है।

बताया जा रहा है कि आरोपी 2019 से अस्पताल में सहायक पद पर कार्यरत था और उसने अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिल और कागजात तैयार किए। यहां तक कि उसने मरीजों से खुद को डॉक्टर बताकर अधिक शुल्क भी वसूला।

डॉक्टर के खिलाफ भी हो सकती है कार्रवाई

ड्रग कंट्रोल विभाग अब इस मामले में अस्पताल के सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर चिराग भंडारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) को पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि उनके यहां केवल अनुमोदित दवाओं का ही उपयोग होता है और किसी भी प्रकार की अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री से उनका कोई संबंध नहीं है।

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