Friday, 10 April 2026

उपराष्ट्रपति ने किया सिंधी भाषा दिवस पर संविधान का विमोचन, देवनानी का बड़ा बयान– “एक दिन सिंध भारत का हिस्सा बन सकता है”


उपराष्ट्रपति ने किया सिंधी भाषा दिवस पर संविधान का विमोचन, देवनानी का बड़ा बयान– “एक दिन सिंध भारत का हिस्सा बन सकता है”

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नई दिल्ली। सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारतीय संविधान के सिंधी भाषा (देवनागरी और फारसी लिपि) में प्रकाशित संस्करणों का विमोचन किया। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि भविष्य में एक दिन ऐसा आ सकता है जब सिंध पाकिस्तान से अलग होकर भारत का अभिन्न हिस्सा बन जाए।

विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने अपने संबोधन में सिंधी समाज के योगदान और उनके इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि विभाजन के समय भारी कष्ट झेलने के बावजूद सिंधी समुदाय ने भारत के प्रति अपनी निष्ठा और सांस्कृतिक पहचान को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता भारत की प्राचीन आत्मा का प्रतीक है और सिंधी समाज ने देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्यमशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संविधान का सिंधी में प्रकाशन ऐतिहासिक कदम

इस समारोह में भारतीय संविधान का पहली बार सिंधी देवनागरी लिपि और दूसरी बार फारसी लिपि में प्रकाशन किया गया, जिसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया। देवनानी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि 1967 में सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था और अब इसका यह अनुवाद सिंधी समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश और दुनिया के 150 से अधिक देशों में फैले सिंधी समाज ने अपनी मेहनत और कौशल से अलग पहचान बनाई है।

सिंधी समाज का वैश्विक योगदान

देवनानी ने कहा कि लगभग एक करोड़ की आबादी वाला सिंधी समाज भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और इनकम टैक्स देने वालों में भी उनकी हिस्सेदारी उल्लेखनीय है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में सिंधी समाज की बड़ी भूमिका होगी।

इस कार्यक्रम में राजस्थान, मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र,उत्तर प्रदेश ,दिल्ली सहित विभिन्न प्रदेशों से दौ सौ से अधिक प्रतिनिधिगण उपस्थित थे जिनमें राजस्थान मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष जस्टिस मूलचन्दानी, एनसीपीएसएल के पूर्व निदेशक प्रताप तिजानी,राजस्थान सिन्धी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी, झूलेलाल सिन्धी सेंट्रल पंचायत समिति के मनीष ग्वालानी, रिटायर्ड व्याख्याता कमला गोकलानी, सिंधु साहित्य कल्चर सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष आर डी थारवानी,अजमेर शाखा के अध्यक्ष सुंदर मटाई , पूज्य लाल साहिब मंदिर के ट्रस्टी प्रभु लोंगानी,अमरापुरा आश्रम जयपुर के सेवाधारी गौरधन आसनानी आदि  भी उपस्थित थे ।

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