Friday, 10 April 2026

जल जीवन मिशन घोटाला: कोर्ट में पेशी के दौरान सुबोध अग्रवाल बोले—“सरेंडर नहीं किया, खुद सहयोग करने आया हूं” तीन दिन के रिमांड पर भेजा


जल जीवन मिशन घोटाला: कोर्ट में पेशी के दौरान सुबोध अग्रवाल बोले—“सरेंडर नहीं किया, खुद सहयोग करने आया हूं” तीन दिन के रिमांड पर भेजा

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जयपुर। जल जीवन मिशन घोटाले में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के दौरान सरेंडर के सवाल पर उन्होंने कहा—“न सरेंडर किया है, न मुझे लेकर आए हैं, मैं खुद अपनी इच्छा से जांच में सहयोग करने आया हूं।”

एसीबी कोर्ट ने पूर्व आईएएस अधिकारी दिशा अग्रवाल को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कोर्ट से 5 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने आंशिक रूप से मंजूरी देते हुए 3 दिन का रिमांड दिया।

कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें

सुनवाई के दौरान एसीबी अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि मामले में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा और पैसों का लेनदेन हुआ है। पूरे नेटवर्क और लेनदेन की जांच के लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ जरूरी है, इसलिए रिमांड की मांग की गई।

वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत नहीं कराया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि मामला लंबे समय से लंबित था, ऐसे में अचानक गिरफ्तारी की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

वहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत नहीं कराया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रिमांड पेशी से पहले गिरफ्तारी के कारण और आवेदन देना आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और दोपहर 2:15 बजे बाद आदेश सुनाने की बात कही।

एसीबी के अनुसार, सुबोध अग्रवाल पर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, पद के दुरुपयोग और फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स मंजूर करने के आरोप हैं। इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी—मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता—अभी भी फरार हैं।

इन फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए जा चुके हैं और उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

260 ठिकानों पर छापेमारी, फिर भी बचता रहा आरोपी

सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी से पहले एसीबी ने 51 दिनों में 18 टीमों के जरिए 260 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान वह लगातार ठिकाने बदलता रहा और 10 से ज्यादा जगहों पर छिपा रहा।

जब कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया और संदिग्ध संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो अगले ही दिन वह सामने आ गया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया।

कई शहरों में छिपने के मिले इनपुट

जांच के दौरान उसके दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मुंबई में छिपे होने की जानकारी मिली थी। एसीबी ने इन सभी स्थानों पर दबिश दी थी, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया।

अब रिमांड मिलने पर एसीबी उससे न केवल घोटाले और टेंडर प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के बारे में पूछताछ करेगी, बल्कि फरारी के दौरान उसे मदद देने वाले लोगों की भी जांच करेगी। विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

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