Tuesday, 14 April 2026

केंद्रीय मंत्री के नाम पर फर्जी दौरा कार्यक्रम जारी, सरकारी प्रोटोकॉल लेने की कोशिश, जयपुर में FIR दर्ज


केंद्रीय मंत्री के नाम पर फर्जी दौरा कार्यक्रम जारी, सरकारी प्रोटोकॉल लेने की कोशिश, जयपुर में FIR दर्ज

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राजस्थान में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें एक शातिर व्यक्ति ने मंत्री के कथित दौरे का फर्जी कार्यक्रम जारी कर सरकारी सुविधाएं और प्रोटोकॉल हासिल करने की कोशिश की। मामले का खुलासा होने के बाद राजस्थान सचिवालय के डिप्टी चीफ प्रोटोकॉल अधिकारी ने जयपुर के अशोक नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार डिप्टी चीफ प्रोटोकॉल अधिकारी मानसिंह मीणा ने अपनी शिकायत में बताया कि मंत्री कार्यालय के नाम और अधिकार का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी की गई। 19 फरवरी को भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नाम से एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें करण सिंह नामक व्यक्ति ने स्वयं को मंत्री का ओएसडी (Officer on Special Duty) बताते हुए राजस्थान दौरे का विस्तृत कार्यक्रम भेजा था।

फर्जी पत्र में 24 से 26 फरवरी तक जयपुर, उदयपुर और राजसमंद जिलों के दौरे का पूरा शेड्यूल शामिल था। इसमें मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात, नाथद्वारा मंदिर दर्शन तथा विभिन्न जिलों में सरकारी प्रोटोकॉल, आवास और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी। पत्र इतना व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया था कि प्रारंभिक स्तर पर इसे आधिकारिक कार्यक्रम समझा गया।

हालांकि जब संबंधित विभागों ने मंत्री कार्यालय से सत्यापन कराया तो पता चला कि करण सिंह नाम का कोई व्यक्ति मंत्री कार्यालय में कार्यरत ही नहीं है और पूरा दौरा कार्यक्रम फर्जी है। इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए अशोक नगर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया।

अशोक नगर थाना प्रभारी मोतीलाल शर्मा ने बताया कि फर्जी प्रोटोकॉल लेटर जारी करने के मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पत्र की उत्पत्ति, इस्तेमाल किए गए संपर्क माध्यम और आरोपियों की पहचान करने के लिए तकनीकी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सरकारी सुविधाओं और प्रोटोकॉल का गलत फायदा उठाने के उद्देश्य से यह साजिश रची गई थी।

इस घटना ने सरकारी प्रोटोकॉल प्रणाली और आधिकारिक पत्राचार की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने की तैयारी में है।

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