



राजस्थान में लगातार बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन वज्र प्रहार 2.0’ के तहत जयपुर (वेस्ट) जिला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जनवरी और फरवरी माह के दौरान साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ठगी से जुड़े बैंक खातों में 1 करोड़ 42 लाख 56 हजार 748 रुपये की राशि होल्ड करवाई, जबकि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 62 लाख 19 हजार 322 रुपये से अधिक की राशि पीड़ितों के खातों में वापस रिफंड करवाई गई है।
डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद मीणा ने बताया कि साइबर सेल प्रभारी अनिल कुमार के सुपरविजन में यह विशेष अभियान संचालित किया गया। साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांजेक्शन रोकने की कार्रवाई की, जिससे ठगों द्वारा रकम आगे ट्रांसफर होने से बचाई जा सकी। समय पर कार्रवाई होने के कारण बड़ी राशि सुरक्षित की जा सकी और जांच के बाद पीड़ितों को राहत मिल पाई।
पुलिस ने साइबर अपराधों के साथ मोबाइल चोरी और गुमशुदगी मामलों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सीईआईआर पोर्टल और विभिन्न थानों में दर्ज शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए जयपुर वेस्ट क्षेत्र से 201 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 38.50 लाख रुपये है। बरामद मोबाइल फोन अब उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए जा रहे हैं।
डीसीपी मीणा ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को झांसे में लेने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर धमकी देना, गैरकानूनी कार्रवाई का डर दिखाना तथा विभिन्न ऐप के माध्यम से पैसा दोगुना करने का लालच देना ठगी के आम तरीके बन चुके हैं। ऐसे मामलों में यदि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कराए तो पुलिस बैंक खातों में राशि होल्ड करवाकर नुकसान को काफी हद तक रोक सकती है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऐप के झांसे में न आएं और साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस द्वारा साइबर ठगी और मोबाइल चोरी से जुड़े मामलों की जांच लगातार जारी है तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।