



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शनिवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। जोरदार हंगामे और कांग्रेस के बहिष्कार के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरकार के दो साल के कार्यकाल पर सदन में जवाब दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विपक्ष ने सरकार को चुनौती दी थी और उसी चुनौती को स्वीकार करते हुए सरकार ने सदन में दो साल के कामकाज का प्रतिवेदन पेश किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 के संकल्प पत्र के 352 बिंदुओं में से 285 बिंदुओं को दो वर्षों के भीतर लागू कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के पास अपने शासनकाल की उपलब्धियां बताने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह बहस से बच रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने विकास कार्य किए होते तो आज उसके “कामों का कॉलम खाली” नहीं होता। सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति हुई, जबकि वर्तमान सरकार विकास और जनकल्याण के एजेंडे पर काम कर रही है।
कांग्रेस विधायकों के सदन से बहिष्कार पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वे सभी दस्तावेजों के साथ चर्चा के लिए तैयार थे, लेकिन कांग्रेस नेताओं में सच्चाई सुनने का साहस नहीं था और वे चर्चा से पहले ही सदन छोड़कर चले गए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नहीं चाहते थे कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सदन में बोलें, इसलिए जानबूझकर हंगामा कराया गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आंतरिक राजनीति के कारण विधानसभा की कार्यवाही बाधित हुई।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार के दो साल के कार्यकाल पर बहस का प्रस्ताव रखा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में “पांच साल बनाम दो साल” पर चर्चा कराने का निर्णय हुआ था। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने विपक्ष की आपत्तियां खारिज कर दीं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री के पूर्व बयान का हवाला देते हुए कहा कि केवल दो साल की बहस कराने से मुख्यमंत्री की घोषणा की अनदेखी हो रही है। इसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच लंबी नोकझोंक हुई और सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी।
इसी दौरान विधानसभा में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायकों ने पेपरलीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर जोरदार नारेबाजी की और पोस्टर लहराए। बीएपी विधायक सीबीआई जांच की मांग लिखी टी-शर्ट पहनकर सदन में पहुंचे और बेरोजगार युवाओं को न्याय दिलाने की मांग उठाई। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने भी विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए तंज कसा, जिसके बाद कुछ समय तक माहौल तनावपूर्ण रहा। बाद में बहस पूरी होने के बाद राजस्व विभाग की अनुदान मांगें सदन से पारित कर दी गईं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जवाब और लगातार हंगामे के बाद विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन में हुई यह बहस राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का संकेत मानी जा रही है।