



जयपुर। राजस्थान सरकार ने नई आबकारी एवं शराब नीति जारी कर दी है, जिसके तहत प्रदेश में 1 अप्रैल से देसी शराब, अंग्रेजी शराब और बीयर की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। आबकारी ड्यूटी बढ़ाए जाने के कारण शराब की कीमतें 5 रुपए से लेकर 20 रुपए तक महंगी हो जाएंगी। नई नीति के अनुसार सरकार ने आबकारी ड्यूटी को 75 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी कर दिया है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से यह बढ़ी हुई दरें लागू होंगी। बीयर की बोतल या कैन करीब 5 रुपए तक महंगी होगी, जबकि 750 एमएल अंग्रेजी शराब की बोतल 20 रुपए तक महंगी मिलेगी।
नई आबकारी नीति में ठेका संचालकों पर भी अतिरिक्त बोझ डाला गया है। वित्त विभाग (आबकारी) के निर्देशानुसार मौजूदा ठेकों के लाइसेंस की रिन्युअल गारंटी फीस बढ़ा दी गई है। इसके चलते ठेकेदारों को पहले की तुलना में ज्यादा शराब बेचनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी, जबकि ठेका संचालकों का कहना है कि दबाव बढ़ने से अवैध बिक्री की आशंका भी बढ़ सकती है।
नीति में शराब की दुकानों की बिक्री समयावधि को लेकर भी बदलाव के संकेत दिए गए हैं। आबकारी आयुक्त को दुकानों की टाइमिंग का रिव्यू करने का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में प्रदेश में शराब की बिक्री सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक होती है। संभावना जताई जा रही है कि समीक्षा के बाद बिक्री का समय दो घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय आबकारी आयुक्त की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
नई नीति के तहत इस बार शराब दुकान संचालकों को एक की जगह दो गोदाम आवंटित करने का प्रावधान किया गया है। गोदामों का उपयोग केवल स्टॉक रखने के लिए होगा, लेकिन खासकर शहरी सीमा से बाहर ग्रामीण इलाकों में इन गोदामों से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें पहले भी आती रही हैं। मौजूदा ठेकेदारों ने आशंका जताई है कि दो गोदामों की व्यवस्था से अवैध बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है।
इसके साथ ही सरकार ने शराब के ठेके के लिए आवेदन शुल्क भी बढ़ा दिया है। पहले 2 करोड़ रुपए तक की न्यूनतम रिजर्व प्राइज वाली दुकानों की नीलामी में हिस्सा लेने के लिए 50 हजार रुपए आवेदन शुल्क लगता था, जिसे बढ़ाकर 60 हजार रुपए कर दिया गया है। वहीं 2 करोड़ रुपए से अधिक रिजर्व प्राइज वाली दुकानों के लिए आवेदन शुल्क 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपए कर दिया गया है।
कुल मिलाकर नई आबकारी नीति के तहत जहां सरकार राजस्व बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है, वहीं आम उपभोक्ताओं को शराब के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी और ठेका संचालकों पर भी बिक्री का दबाव बढ़ेगा।